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    ‘ज्यूडीशियल करप्शन’ चैप्टर वाली NCERT किताब की बिक्री पर रोक:CJI ने कहा था- न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत किसी को नहीं; केस खुद देखूंगा

    14 hours ago

    सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की कड़ी आपत्ति के बाद ज्यूडीशियल करप्शन’ चैप्टर वाली NCERT की किताब की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। NCERT के सूत्रों ने न्यूज एजेंसी ANI से इसकी पुष्टि की है। सरकार के सूत्रों ने कहा कि यह सेक्शन लिखा ही नहीं जाना चाहिए था और ऐसे पहलुओं को उजागर करना ठीक नहीं है। सरकार का कहना है कि बच्चों की किताबों में ऐसी चीजें होनी चाहिए जो प्रेरणा दें। CJI सूर्यकांत ने बुधवार को इस मुद्दे पर नाराजगी जताई थी। CJI ने कहा था- दुनिया में किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। यह एक सोचा-समझा फैसला लगता है। मैं यह केस खुद हैंडल करूंगा। सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में यह मामला उठाया था। बेंच में CJI सूर्यकांत, जस्टिस विपुल एम पंचोली और जस्टिस जॉयमाल्या बागची शामिल थे। चीफ जस्टिस ने कहा- मुझे इसकी पूरी जानकारी है। यह पूरे ज्यूडीशियल इंस्टीट्यूशन के लिए चिंता की बात है। यह सोचा-समझा कदम लग रहा है। मैं किसी को भी, चाहे वे कितने भी ऊंचे पद पर क्यों न हो, इंस्टीट्यूशन को बदनाम नहीं करने दूंगा। मैं इस मामले पर खुद नोटिस ले रहा हूं। NCERT की नई सोशल साइंस टेक्स्टबुक में ज्यूडीशियरी में करप्शन पर चैप्टर NCERT ने 23 फरवरी को जारी नई टेक्‍स्‍टबुक ‘एक्सप्लोरिंग सोसायटी: इंडिया एंड बियॉन्ड पार्ट 2’ में ‘द रोल ऑफ द ज्यूडीशियरी इन अवर सोसायटी’ टॉपिक के अंदर ज्‍यूडिशियरी में करप्‍शन का टॉपिक जोड़ा है। इसका पहला पार्ट जुलाई 2025 में रिलीज किया गया था। ये किताब एकेडमिक सेशन 2026-27 से स्‍कूलों में पढ़ाई जानी है। सोशल साइंस की इस किताब में लिखा गया है- ‘Justice delayed is justice denied’, यानी इंसाफ में देरी नाइंसाफी की तरह है। यहां सुप्रीम कोर्ट में 81 हजार, हाईकोर्ट्स में 62 लाख 40 हजार, डिस्ट्रिक्ट और सबऑर्डिनेट कोर्ट के 4 करोड़ 70 लाख पेंडिंग केस की संख्या भी बताई गई है। किताब का वो हिस्सा जिसमें करप्शन और पेंडिंग केस का जिक्र… सीनियर वकील बोले- किताब में ब्यूरोक्रेसी, पॉलिटिक्स पर एक शब्द नहीं सीनियर वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक एम सिंघवी ने CJI की बेंच के सामने कहा- बच्चों को ज्यूडिशियरी में करप्शन का सब्जेक्ट ऐसे पढ़ाया जा रहा है जैसे यह कहीं और, किसी और इंस्टीट्यूशन में है ही नहीं। यह चिंता का विषय है। हम यहां बार काउंसिल की चिंता लेकर आए हैं। दोनों वकीलों ने कहा, “किताब में ब्यूरोक्रेसी, पॉलिटिक्स वगैरह को छोड़ दिया है। दूसरे सेक्टर्स पर एक शब्द भी नहीं। वे ऐसे पढ़ा रहे हैं जैसे यह सिर्फ़ इसी इंस्टीट्यूशन में है।” जवाब में CJI ने कहा, “प्लीज थोड़ा इंतजार करें। मुझे बार और बेंच दोनों से बहुत सारे कॉल, मैसेज आ रहे हैं। सभी हाईकोर्ट के जज समेत सिस्टम का हर स्टेकहोल्डर परेशान है। मैं इस मामले को खुद देखूंगा। कानून अपना काम करेगा।” बेंच में शामिल जस्टिस बागची ने भी कहा कि यह किताब बेसिक स्ट्रक्चर के ही खिलाफ लगती है। नई किताब में ज्यूडीशियरी से जुड़े अहम पॉइंट्स… किताब में पूर्व CJI बीआर गवई का भी जिक्र किताब में भारत के पूर्व चीफ जस्टिस बीआर गवई का भी जिक्र है, जिन्होंने जुलाई 2025 में कहा था कि ज्यूडिशियरी के अंदर करप्शन और गलत कामों के मामलों का पब्लिक ट्रस्ट पर बुरा असर पड़ता है। उन्होंने कहा था, "हालांकि, इस ट्रस्ट को फिर से बनाने का रास्ता इन मुद्दों को सुलझाने के लिए उठाए गए तेज, निर्णायक और ट्रांसपेरेंट एक्शन में है... ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी डेमोक्रेटिक गुण हैं।" NCERT की किताब 23 फरवरी को जारी, लेकिन अब वेबसाइट पर मौजूद नहीं NCERT की 8वीं क्लास की सोशल साइंस का पार्ट 2 इसी हफ्ते जारी हुआ है। CJI की टिप्‍पणी के बाद फिलहाल ये किताब NCERT की वेबसाइट पर उपलब्‍ध नहीं है। एक न्‍यूज रिपोर्ट के मुताबिक किताबों की ऑफलाइन बिक्री भी मंगलवार 24 फरवरी से बंद कर दी गई है। हालांकि अब तक NCERT की तरफ इसको लेकर कोई बयान नहीं आया है। NCERT ने नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क यानी NCF और NEP-2020 के तहत सभी क्‍लासेज की नई किताबें तैयार की हैं। कोरोना महामारी के बाद पुरानी किताबों के टॉपिक्‍स को बदलकर नए टॉपिक्‍स किताबों में जोड़े जा रहे हैं। पहली से 8वीं क्लास तक की नई किताबें 2025 में ही पब्लिश की जा चुकी हैं। ------------------------------ ये खबर भी पढ़ें… NCERT ने 8वीं क्लास की सोशल साइंस की किताब में जोड़ा न्यायपालिक से जुड़ा सेक्शन नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने पहली बार 8वीं के बच्चों के लिए ज्यूडीशियरी में करप्शन के बारे में पढ़ाने का फैसला लिया गया। यह पिछले एडिशन के मुकाबले बड़ा बदलाव था। पिछले चैप्टर में ज्यादातर कोर्ट के स्ट्रक्चर और रोल पर फोकस किया गया था। बदले हुए चैप्टर का नाम ‘हमारे समाज में ज्यूडिशियरी की भूमिका’ रखा गया। पढ़ें पूरी खबर…
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