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    वर्ल्ड अपडेट्स:पाकिस्तान में गैस लीकेज से घर में धमाका, इमारत का हिस्सा ढहा, 10 लोगों की मौत, 11 घायल

    12 hours ago

    पाकिस्तान के कराची में मंगलवार को एक रिहायशी इमारत का हिस्सा गिरने से 10 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। हादसे में 11 लोग घायल हुए हैं। रेस्क्यू सेवाओं के मुताबिक, गुल राणा कॉलोनी में संदिग्ध गैस रिसाव के कारण विस्फोट हुआ, जिसके बाद इमारत का हिस्सा ढह गया। घायलों और मृतकों को सिविल अस्पताल पहुंचाया गया है। पुलिस के प्रवक्ता ने बताया, ‘शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार गैस लीकेज के कारण विस्फोट हुआ, जिससे इमारत का हिस्सा गिर गया।’ रेस्क्यू टीम ने कहा कि मौके पर तलाशी और बचाव अभियान जारी है। पुलिस ने इलाके को घेरकर सुरक्षा कड़ी कर दी है, जबकि बचाव एजेंसियों ने मलबे में फंसे लोगों की तलाश शुरू कर दी। पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे जुलाई 2025 में लियारी इलाके में पांच मंजिला इमारत गिरने से 27 लोगों की मौत हो गई थी और 10 लोग घायल हुए थे। अगस्त 2025 में ओरंगी टाउन में अवामी नेशनल पार्टी (ANP) के कार्यालय में गैस धमाके के बाद इमारत ढह गई थी। उस हादसे में पार्टी के चार कार्यकर्ता घायल हुए थे, जिनमें एक को गंभीर जलन आई थी। उस इमारत को पहले ही उसकी जर्जर हालत के कारण रहने लायक घोषित नहीं किया गया था। उस समय सिंध बिल्डिंग कंट्रोल अथॉरिटी ने बयान में कहा था कि कराची में 588 इमारतों को खतरनाक घोषित किया गया है। पाकिस्तान में छत और इमारत गिरने की घटनाएं आम हैं। इसकी बड़ी वजह खराब निर्माण मानक और घटिया सामग्री का इस्तेमाल है। 20 मिलियन से ज्यादा आबादी वाले कराची में अवैध निर्माण, पुराना ढांचा, ओवरक्राउडिंग और बिल्डिंग नियमों का ढीला पालन लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… अमेरिका में बर्फ की चट्टान खिसकने से 8 लोगों की मौत, 1 लापता; 45 साल में सबसे घातक हादसा कैलिफोर्निया के सिएरा नेवादा पर्वतों में मंगलवार को बर्फ की चट्टान खिसकने से 15 लोगों का एक ग्रुप फंस गया। यह ग्रुप ब्लैकबर्ड माउंटेन गाइड्स कंपनी के साथ तीन दिनों की गाइडेड ट्रिप पर था। दोपहर करीब 11:30 बजे हिमस्खलन ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। अधिकारियों के अनुसार, इस हादसे में आठ लोगों की मौत हो गई है और एक 1 भी लापता है, जिसे मृत मान लिया गया है। बुधवार को नेगाडा काउंटी शेरिफ शैनन मून ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी। मृतकों में कंपनी के तीन गाइड भी शामिल हैं। कुल मृत और लापता लोगों में सात महिलाएं और दो पुरुष हैं। 6 लोगों को मंगलवार शाम को बचाया गया। यह अमेरिका में पिछले 45 सालों का सबसे घातक हिमस्खलन है, जो 1981 में वॉशिंगटन के माउंट रेनियर पर हुए हादसे के बाद दूसरा सबसे बड़ा है, जिसमें 11 लोगों की मौत हुई थी। हादसा होने के समय इलाके में भारी बर्फबारी हो रही थी। यहां पिछले 36 घंटों में 2 से 3 फीट नई बर्फ गिरी और प्रति घंटा 2-4 इंच बर्फ गिर रही थी। तेज हवाओं से सफेद धुंध की स्थिति बन गई थी, जिससे हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर सके और ग्राउंड रेस्क्यू टीमों को भी काफी मुश्किल हुई। सिएरा एवलांच सेंटर ने पहले से ही हाई भारी बर्फबारी के खतरे की चेतावनी जारी की थी और यात्रा न करने की सलाह दी थी। मृतकों के शव बर्फ में दबे हुए हैं और मौसम साफ होने पर रिकवर किए जाएंगे, ताकि पोस्टमॉर्टम के बाद परिवारों को सौंपे जा सकें। शेरिफ ने कहा कि कंपनी के फैसले पर अभी जांच चल रही है कि इतने खतरनाक हालात में ग्रुप को क्यों भेजा गया। कंपनी के अनुसार, ट्रिप के लिए ग्रुप को अच्छी फिजिकल फिटनेस की जरूरत होती है। यह हादसा लेक ताहो के उत्तर-पश्चिम में डोनर पास के पास हुआ, जहां इंटरस्टेट 80 भी बंद हो गई थी। कनाडा के इमिग्रेशन नियम में बदलाव, रिसर्च और डिफेंस सेक्टर को प्राथमिकता कनाडा ने अपने इमिग्रेशन नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब सरकार रिसर्च, हेल्थ केयर, एविएशन और रक्षा क्षेत्र के कुशल पेशेवरों को प्राथमिकता देगी। 2026 से एक्सप्रेस एंट्री सिस्टम में नई श्रेणियां जोड़ी जाएंगी। इनमें शोधकर्ता, पायलट, एयरक्राफ्ट मैकेनिक और कनाडा में काम का अनुभव रखने वाले विदेशी डॉक्टर शामिल होंगे। पहली बार विदेशी सैन्य पेशेवरों को भी इस प्रक्रिया में मौका मिलेगा। कनाडाई सशस्त्र बलों के लिए सैन्य डॉक्टर, नर्स और पायलट जैसे विशेषज्ञों की भर्ती की जाएगी। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब कनाडा अपनी रक्षा ताकत बढ़ाने और अमेरिका पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रहा है। सरकार ने अगले दस साल के लिए बड़ा रक्षा प्लान भी बनाया है। रक्षा से जुड़ी रिसर्च और नई तकनीक पर खर्च 85% तक बढ़ाया जाएगा। रक्षा उद्योग की कमाई 240% से ज्यादा बढ़ाने और रक्षा सामान के निर्यात में 50% तक इजाफा करने का लक्ष्य है। इससे करीब 1 लाख 25 हजार नई नौकरियां बनने की उम्मीद है। साथ ही 2035 तक रक्षा खर्च को जीडीपी के 5 प्रतिशत तक ले जाने की योजना है। फ्रेंच भाषा जानने वाले और हेल्थ केयर सेक्टर से जुड़े उम्मीदवारों के लिए मौजूदा श्रेणियां पहले की तरह जारी रहेंगी। सरकार का कहना है कि इन बदलावों से जरूरी क्षेत्रों में तुरंत काम करने वाले पेशेवर मिलेंगे और इमिग्रेशन व्यवस्था संतुलित रहेगी। फ्रांसीसी राष्ट्रपति बोले- सोशल मीडिया यूजर के दिमाग से खेल रहा, यह फ्री स्पीच के लिए खतरनाक भारत दौरे पर आए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने AI, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और उनके प्रमुखों पर खुलकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अगर लोगों को यह नहीं पता कि उन्हें किस तरह कंटेंट दिखाया जा रहा है, तो फ्री स्पीच बकवास है। मैक्रों ने कहा कि असली समस्या अभिव्यक्ति की आजादी नहीं, बल्कि वे ऐसे एल्गोरिदम हैं जो तय करते हैं कि यूजर क्या देखेगा और किस दिशा में जाएगा। मैक्रों ने कहा कि कुछ टेक कंपनियां खुद को फ्री स्पीच का समर्थक बताती हैं, लेकिन एल्गोरिदम को अपने कब्जे में रखा है। सोशल मीडिया एल्गोरिदम नियमों और निर्देशों का एक ग्रुप है जो प्लेटफॉर्म पर कंटेंट को छांटता है, प्राथमिकता देता है और व्यवस्थित करता है। यह यूजर के पिछले व्यवहार, पसंद-नापसंद, और सहभागिता का विश्लेषण करके, उनकी फीड में सबसे प्रासंगिक सामग्री को दिखाता है। मैक्रों ने चेतावनी दी कि अगर लोगों को यह नहीं पता कि एल्गोरिदम कैसे बनाए गए, कैसे टेस्ट और ट्रेन किए गए, तो वे उन्हें किस दिशा में ले जा रहे हैं। इसके लोकतांत्रिक परिणाम बहुत गंभीर हो सकते हैं। मैक्रों ने इस दावे को भी खारिज किया कि प्लेटफॉर्म खुद को तटस्थ बता सकते हैं, जबकि वे चुपचाप यूजर्स को ज्यादा चरमपंथी कंटेंट की ओर धकेलते हैं। उन्होंने कहा, “अगर आपको यह नहीं पता कि आपको किस तरह इस फ्री स्पीच की ओर ले जाया जा रहा है, तो यह फ्री स्पीच नहीं है। खासकर तब, जब आपको एक नफरती भाषण से दूसरे नफरती भाषण तक पहुंचाया जा रहा हो।” उन्होंने कहा कि वे एक पारदर्शी व्यवस्था चाहते हैं, जहां अलग-अलग विचारों के बीच जाने का रास्ता साफ हो। साथ ही उन्होंने नस्लवादी और नफरती कंटेंट पर रोक लगाने के लिए सुरक्षा उपायों की मांग की। मैक्रों ने कहा, “मैं सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना चाहता हूं। मैं नस्लवादी और नफरती भाषण से बचना चाहता हूं।” मैक्रों की सरकार पहले भी फ्रांस और यूरोपीय संघ में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर सख्त निगरानी की वकालत करती रही है। उनका कहना है कि बिना नियंत्रण वाले एल्गोरिदम सिर्फ यूजर्स के लिए ही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक स्थिरता के लिए भी जोखिम पैदा कर सकते हैं।
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