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    वर्ल्ड अपडेट्स:बांग्लादेश ने 2 महीने बाद दिल्ली में वीजा सर्विस बहाल की, तारिक रहमान के PM बनने के 3 दिन बाद फैसला

    15 hours ago

    भारत-बांग्लादेश रिश्तों में नरमी की शुरुआत होती दिख रही है। बांग्लादेश हाई कमीशन ने शुक्रवार को दिल्ली में भारतीय नागरिकों के लिए वीजा सेवाएं फिर से शुरू कर दीं। यह फैसला बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान के पद संभालने के तीन दिन बाद आया है। दोनों देशों के बीच दिसंबर में तनाव बढ़ने के बाद वीजा और काउंसलर सेवाएं रोक दी गई थीं। अब इसे रिश्तों में सुधार की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक सभी कैटेगरी की वीजा सेवाएं भारतीयों के लिए बहाल कर दी गई हैं। इससे एक दिन पहले भारत के एक वरिष्ठ कॉन्सुलर अधिकारी ने भी कहा था कि नई दिल्ली जल्द ही बांग्लादेश में सभी वीजा सेवाएं बहाल करेगी। दिसंबर में भारत विरोधी युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते खराब हो गए थे। हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। इन प्रदर्शनों में भारत विरोधी नारेबाजी हुई। इस दौरान कई हिंदुओं को निशाना बनाया गया और उनकी लिंचिंग की घटनाएं सामने आईं। इसके बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव काफी बढ़ गया था और वीजा सेवाएं रोक दी गई थीं। ढाका में सत्ता से मोहम्मद यूनुस के हटने और तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत के साथ रिश्तों में सुधार के संकेत मिले हैं। दिल्ली में वीजा सेवा बहाल करने का फैसला इसी दिशा में शुरुआती कदम माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… ट्रम्प का UFO और एलियन से जुड़ी फाइलें जारी करने का आदेश, कहा- हर जानकारी सामने लाई जाएगी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को कहा कि वे सरकारी एजेंसियों को UFO और एलियन से जुड़ी फाइलें खोजने और उन्हें जारी करने की प्रोसेस शुरू करने का आदेश दे रहे हैं। कई सालों से कुछ लोग इन फाइलों को सार्वजनिक करने की मांग कर रहे थे। ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि वे रक्षा सचिव और दूसरे संबंधित विभागों को निर्देश देंगे कि वे एलियन जीवन, अनजान हवाई घटनाओं (UAP) और अनजान उड़ने वाली वस्तुओं (UFO) से जुड़ी सरकारी फाइलों की पहचान करें और उन्हें जारी करें। उन्होंने यह नहीं बताया कि क्या सीक्रेट दस्तावेज भी जनता के सामने लाए जाएंगे। उन्होंने इतना कहा कि इन मामलों से जुड़ी हर तरह की जानकारी शामिल होनी चाहिए। इसी दिन पहले ट्रम्प ने दावा किया कि पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने हाल ही में एक वायरल पॉडकास्ट में एलियन के अस्तित्व पर बात करते हुए सीक्रेट जानकारी उजागर कर दी है। ओबामा ने पॉडकास्ट होस्ट ब्रायन टायलर कोहेन से बातचीत में कहा था कि एलियन 'वास्तव में हैं', लेकिन उन्होंने उन्हें नहीं देखा है और उन्हें एरिया 51 में नहीं रखा गया है। एरिया 51 अमेरिका का एक बेहद सीक्रेट मिलिट्री ठिकाना है, जिसके बारे में कई साजिश की कहानियां जुड़ी रही हैं। ओबामा ने यह भी कहा कि कोई सीक्रेट बंकर फैसिलिटी नहीं है। जब ट्रम्प से ओबामा के बयान पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ओबामा ने क्लासिफाइड जानकारी दे दी, जो उन्हें नहीं करना चाहिए था। हालांकि ट्रम्प ने यह साफ नहीं किया कि ओबामा की किस बात को गोपनीय बताया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि ओबामा ने बड़ी गलती की। बच्चों की सोशल मीडिया पर लत पर कोर्ट ने जुकरबर्ग से पूछा- क्या 9 साल का बच्चा आपकी शर्तें पढ़ेगा अमेरिका के लॉस एंजिलिस की एक अदालत में मार्क जुकरबर्ग से कड़े सवाल पूछे गए। मामला बच्चों को सोशल मीडिया की लत लगने से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान जज और वकीलों ने पूछा कि क्या इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म बच्चों को जानबूझकर ऐसा कंटेंट दिखाते हैं जिससे उन्हें लत लग जाए और उन्हें नुकसान हो। यह मामला इंस्टाग्राम और फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान जुकरबर्ग कुछ सवालों पर असहज नजर आए और वकीलों की दलीलों पर नाराज भी दिखे। कोर्ट में जुकरबर्ग ने कहा कि उनकी कंपनी ने कम उम्र के बच्चों की पहचान करने के तरीके बेहतर किए हैं। उन्होंने यह भी माना कि कई बच्चे अकाउंट बनाते समय अपनी असली उम्र नहीं बताते और झूठी उम्र डाल देते हैं। कंपनी ऐसे अकाउंट्स को पहचानकर हटाने की कोशिश करती है। इस पर केस करने वाले वकीलों ने सवाल उठाया कि क्या कोई 9 साल का बच्चा अकाउंट बनाते समय लिखी गई लंबी और मुश्किल शर्तें पढ़ सकता है? उनका कहना था कि इतनी छोटी उम्र के बच्चे नियम और शर्तें समझ ही नहीं सकते, फिर कंपनी कैसे मान लेती है कि वे सब समझकर अकाउंट बना रहे हैं। भारत ने अमेरिकी गठबंधन ‘पैक्स सिलिका’ जॉइन किया, ये सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन सुरक्षित बनाने की पहल भारत ने शुक्रवार को अमेरिका की अगुआई वाले रणनीतिक गठबंधन 'पैक्स सिलिका' को जॉइन कर लिया है। यह गठबंधन दिसंबर 2025 में शुरू किया गया था। इसका मकसद दुनिया में AI और सेमीकंडक्टर की सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाना और गैर-सहयोगी देशों पर निर्भरता कम करना है। भारत के शामिल होने से दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत होंगे। खासकर महत्वपूर्ण खनिजों, सेमीकंडक्टर प्रोडक्शन और तेजी से बढ़ रही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर में सहयोग बढ़ेगा। इससे सुरक्षित और मजबूत ग्लोबल टेक्नोलॉजी सिस्टम बनाने में मदद मिलेगी। यह फैसला ऐसे समय में हो रहा है जब दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश चल रही है। दोनों देश आपसी रिश्तों को और मजबूत करना चाहते हैं। अमेरिका के अलावा इस गठबंधन में ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, इजराइल, जापान, कतर, साउथ कोरिया, सिंगापुर, UAE और ब्रिटेन जैसे देश शामिल हैं। पैक्स सिलिका क्या करेगा? अमेरिका के आर्थिक मामलों के अंडर सेक्रेटरी जैकब हेलबर्ग ने कहा कि 20वीं सदी में तेल और स्टील ने दुनिया को आगे बढ़ाया, लेकिन 21वीं सदी में दुनिया कंप्यूटर पर चल रही है। कंप्यूटर और AI सिस्टम बनाने के लिए लिथियम और कोबाल्ट जैसे खनिज जरूरी हैं। पैक्स सिलिका का मकसद भरोसेमंद देशों के साथ मिलकर एक साझा योजना बनाना है, ताकि भविष्य की AI और टेक्नोलॉजी सिस्टम तैयार किए जा सकें। यह पहल टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन के हर हिस्से को कवर करती है, जैसे ऊर्जा, जरूरी खनिज, हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग, चिप्स और AI मॉडल। इसमें शामिल देश तकनीकी प्रगति, आर्थिक सुरक्षा और समृद्धि के लिए मिलकर काम करने पर सहमत हैं। क्या है इसका बड़ा मकसद? इस गठबंधन का मकसद टेक्नोलॉजी में आगे रहने वाले देशों को एक साथ लाना है। मिलकर काम करने से AI की पूरी आर्थिक क्षमता का फायदा उठाया जा सकेगा और नई AI आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। पैक्स सिलिका के घोषणा पत्र में कहा गया है कि AI की तकनीकी क्रांति बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। यह दुनिया की अर्थव्यवस्था और ग्लोबल सप्लाई चेन को बदल रही है। AI की वजह से ऊर्जा की मांग बढ़ रही है, क्योंकि बड़े कंप्यूटर सिस्टम और डेटा सेंटर को चलाने के लिए ज्यादा बिजली चाहिए। इसके साथ ही जरूरी खनिज, चिप्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और नए बाजारों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। इस पहल का एक बड़ा लक्ष्य यह है कि कोई भी देश किसी एक देश पर बहुत ज्यादा निर्भर न रहे। यानी कच्चे माल, टेक्नोलॉजी या उत्पादों के लिए किसी एक देश पर पूरी तरह निर्भरता कम की जाए, ताकि व्यापार में दबाव या राजनीतिक दबाव से बचा जा सके। दूसरा मकसद सुरक्षित डिजिटल ढांचा तैयार करना है और यह सुनिश्चित करना है कि आधुनिक तकनीक की चोरी या गलत इस्तेमाल न हो सके। ट्रम्प बोले- मैंने भारत-PAK को 200% टैरिफ की चेतावनी दी:तब लड़ाई रोकने के लिए माने, संघर्ष में 11 फाइटर जेट्स गिरे थे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को वॉशिंगटन में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ कार्यक्रम में फिर से भारत-पाकिस्तान संघर्ष रुकवाने का दावा किया। उन्होंने कहा कि मैंने देशों पर 200% टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी। इसके बाद वे संघर्ष रोकने के लिए माने। ट्रम्प ने कहा कि उस समय दोनों देशों के बीच हालात बहुत खराब थे, लड़ाई तेज हो गई थी और विमान गिराए जा रहे थे। मैंने दोनों नेताओं (मोदी और शहबाज शरीफ) को फोन किया। मैं पीएम मोदी को अच्छी तरह जानता हूं। ट्रम्प ने कहा कि मैंने दोनों से साफ कह दिया था कि अगर वे झगड़ा खत्म नहीं करेंगे तो मैं उनके साथ कोई व्यापार समझौता नहीं करूंगा। ट्रम्प के मुताबिक दोनों देश लड़ना चाहते थे, लेकिन जब पैसे का मामला आया और नुकसान की बात सामने आई तो वे मान गए। ट्रम्प ने दावा किया कि इस संघर्ष के दौरान 11 महंगे फाइटर जेट्स गिराए गए थे। हालांकि उन्होंने ये नहीं बताया कि ये फाइटर जेट्स किसी देश के थे। पढ़ें पूरी खबर…
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