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    उत्तराखंड पुलिस को भ्रष्ट बता सिर में गोली मारी:बोला- बॉडी पार्ट्स बेचकर पैसे SSP को दे देना, 26 आरोपियों पर मुकदमा, चौकी लाइन हाजिर

    4 days ago

    ऊधम सिंह नगर के सिख किसान सुखवंत सिंह ने 4 करोड़ की ठगी और पुलिस से परेशान होकर नैनीताल में खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। इस मामले में मृतक के भाई परविंदर सिंह की तहरीर पर पुलिस ने 26 नामजद आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। थाना आईटीआई पुलिस का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर दोषियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। इससे पूर्व मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी ने तत्काल प्रभाव से दो पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया, जबकि चौकी पैगा पर तैनात संपूर्ण पुलिस टीम को लाइन हाजिर किया गया है। थानाध्यक्ष, कोतवाली आईटीआई उपनिरीक्षक कुंदन सिंह रौतेला और कोतवाली आईटीआई उपनिरीक्षक प्रकाश बिष्ट पर कार्रवाई की गई है। किसान ने गोली मारने से पहले फेसबुक लाइव पर वीडियो बनाई थी, जिसमें पुलिस को भ्रष्ट बताकर कहा था कि - बॉडी पार्ट्स बेचकर पैसे SSP को दे देना। इन 26 लोगों पर दर्ज हुआ केस अमरजीत सिंह, आशीष चौहान, कुलविंदर सिंह उर्फ जस्सी, दिव्या, रविन्द्र कौर, लवप्रीत कौर, हरदीप कौर, आशीष की पत्नी, गिरवर सिंह, महीपाल सिंह, शिवेन्द्र सिंह, विमल व उसकी पत्नी, देवेन्द्र, राजेन्द्र, गुरप्रेम सिंह, जगपाल सिंह, जगवीर राय, मनप्रीत कलसी, अमित, मोहित, सुखवन्त सिंह पन्नू, वीरपाल सिंह पन्नू, बलवन्त सिंह बक्सौरा, बिजेन्द्र, पूजा और जहीर। मरने से पहले बनाई थी फेसबुक पर लाइव वीडियो सुखवंत अपनी पत्नी और बच्चे के साथ घूमने के लिए नैनीताल आए थे। मरने से पहले उन्होंने फेसबुक लाइव वीडियो बनाकर बताया कि वह फ्रॉड के कारण परेशान हैं साथ ही उन्होंने उत्तराखंड पुलिस को सबसे भ्रष्ट भी बताया। वीडियो में सुखवंत ने आरोप लगाया कि शिकायतों के बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा - हमारे शरीर के सारे पार्ट्स बेचकर जो भी पैसे मिलें, वो एसएसपी मणिकांत मिश्रा, एएसओ कुंदन सिंह रौतेला, प्रकाश बिष्ट थाना आईटीआई और पैगा चौकी के सारे अधिकारी-कर्मचारियों को बांट दिए जाएं, ताकि इनके बीवी बच्चे उस पैसे से मौज कर सकें। वहीं, रविवार शाम पार्थिव शरीर घर पहुंचा तो परिजनों ने प्रशासन को अल्टीमेटम दे दिया। परिवार की मांग है कि सोमवार दोपहर 12 बजे तक सुखवंत की आखिरी वीडियो को सबूत मानते हुए जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों को निलंबित किया जाए। ऐसा नहीं किया गया तो शव थाने पर रखकर प्रदर्शन किया जाएगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत को मजिस्ट्रेट जांच के निर्देश दिए हैं, जबकि उत्तराखंड के एडीजी (कानून व्यवस्था) डॉ. वी. मुरुगेशन ने कुमाऊं रेंज के आईजी रिद्धिम अग्रवाल को गहन जांच कर रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए हैं। कांग्रेस विधायक बोले- आत्महत्या नहीं बल्कि सिस्टम द्वारा की गई हत्या सुखवंत सिंह के आवास पर शोक संवेदना व्यक्त करने वालों का तांता लगा रहा। इस दौरान काशीपुर विधायक त्रिलोक सिंह चीमा, जयपुर से कांग्रेस विधायक आदेश चौहान, भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष गुंजन सुखीजा, वरिष्ठ भाजपा नेता आशीष गुप्ता, आईसीसी सदस्य अनुपम शर्मा और पूर्व कांग्रेस महानगर अध्यक्ष मुशर्रफ हुसैन शाहिद भी मौजूद रहे। जयपुर से पहुंचे कांग्रेस विधायक आदेश चौहान ने इस घटना को “आत्महत्या नहीं बल्कि सिस्टम द्वारा की गई हत्या” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर प्रशासन किसान के साथ खड़ा होता तो सुखवंत सिंह आज जीवित होता। ये आत्महत्या नहीं, बल्कि सिस्टम के द्वारा की गई हत्या है। अगर सरकार और प्रशासन किसान के साथ खड़ा होता, तो आज सुखवंत हमारे बीच होता। दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित कर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। अगर मजिस्ट्रेट जांच सही नहीं चली तो सीबीआई जांच की मांग की जाएगी। वहीं, काशीपुर विधायक त्रिलोक सिंह चीमा ने घटना को बेहद दुखद बताया और कहा कि उन्होंने खुद सीएम पुष्कर सिंह धामी से बात की है। यह बहुत दुखद घटना है। मैंने मुख्यमंत्री से बात की है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर वरिष्ठ अधिकारी दीपक रावत के नेतृत्व में मजिस्ट्रेटी जांच बैठाई गई है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। पहले 5 पॉइंट्स में जानिए लाइव आकर सुखवंत ने क्या कहा अब समझिए परिवार की मांगें... वीडियो को सबूत मानो, अधिकारियों पर FIR और सस्पेंशन मृतक सुखवंत सिंह के परिवार ने प्रशासन के सामने पहली और सबसे अहम मांग रखी कि आत्महत्या से पहले बनाए गए वायरल फेसबुक लाइव वीडियो को प्राथमिक सबूत माना जाए। परिवार का कहना था कि वीडियो में जिन अधिकारियों और अन्य लोगों के नाम लेकर आरोप लगाए गए हैं, उनके खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज किया जाए। परिजनों की मांग थी कि जिन पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों पर सुखवंत सिंह ने मिलीभगत और उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं, उन्हें जांच पूरी होने तक तुरंत निलंबित किया जाए। परिवार का कहना है कि अगर वीडियो को नजरअंदाज किया गया, तो यह सीधे-सीधे सच्चाई को दबाने जैसा होगा। CBI जांच और ठगे गए पैसे की वापसी की मांग परिवार की दूसरी बड़ी मांग यह है कि मृतक की आखिरी इच्छा के अनुसार पूरे मामले की जांच केवल CBI से कराई जाए। परिजनों का कहना है कि सुखवंत सिंह ने वीडियो में साफ कहा था कि उसे उत्तराखंड पुलिस पर भरोसा नहीं है और स्थानीय स्तर पर निष्पक्ष जांच संभव नहीं है। तीसरी मांग के तहत परिवार चाहता है कि जमीन धोखाधड़ी में गए करीब 4 करोड़ रुपए उन्हें वापस दिलाए जाएं। इसके लिए आरोपियों की संपत्ति कुर्क करने का भी सुझाव दिया गया है। परिवार का कहना है कि जब तक ठगे गए पैसे की भरपाई और दोषियों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक न्याय अधूरा रहेगा। सुखवंत सिंह, और पूरी घटना के बारे में जानिए..... सुखवंत सिंह ऊधमसिंह नगर जिले के काशीपुर क्षेत्र के रहने वाले सिख किसान थे। उनका पैतृक गांव पैगा बताया गया है। परिवार के मुताबिक उनकी शादी साल 2010 में बिजनौर निवासी प्रदीप कौर से हुई थी। सुखवंत सिंह अपनी पत्नी और 12 साल के बेटे के साथ काशीपुर में रहते थे और खेती के साथ जमीन से जुड़े सौदों में भी शामिल थे। जमीन सौदे में कैसे शुरू हुआ विवाद परिजनों के मुताबिक सुखवंत सिंह ने प्रॉपर्टी डीलरों के साथ 35 लाख रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से करीब 7 एकड़ जमीन का सौदा किया था। इस सौदे में अलग-अलग चरणों में उनसे करीब 4 करोड़ रुपए लिए गए। आरोप है कि जिस जमीन की रजिस्ट्री होनी थी, उसकी जगह धोखे से पास की कम कीमत वाली जमीन की रजिस्ट्री करा दी गई। जब सुखवंत सिंह को इस धोखाधड़ी का पता चला तो उन्होंने डीलरों से लेकर पुलिस तक शिकायत की, लेकिन न तो जमीन सही मिली और न ही पैसा वापस हुआ। इसी विवाद के बाद वह लगातार मानसिक तनाव में रहने लगे। पुलिस से शिकायत, लेकिन सुनवाई नहीं होने का आरोप परिवार और खुद सुखवंत सिंह के वीडियो के मुताबिक, जमीन धोखाधड़ी की शिकायत लेकर वह थाना आईटीआई, पैगा चौकी और फिर एसएसपी कार्यालय तक पहुंचे। आरोप है कि कहीं भी उनकी शिकायत पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वीडियो में सुखवंत सिंह ने दावा किया कि उल्टा पुलिस की ओर से उन्हें गाली-गलौज और दबाव का सामना करना पड़ा। परिजनों का कहना है कि पिछले करीब चार से छह महीनों से सुखवंत सिंह लगातार पुलिस और अधिकारियों के चक्कर काट रहे थे, जिससे उनका मानसिक दबाव लगातार बढ़ता चला गया। घूमने निकले, हाईकोर्ट भी पहुंचे मृतक के पिता के मुताबिक 3 जनवरी को सुखवंत सिंह अपनी पत्नी और बेटे के साथ घर से घूमने के लिए निकले थे। पहले वह बिजनौर स्थित ससुराल पहुंचे, फिर अपनी मां के घर गए। इसके बाद 8 जनवरी को वह नैनीताल पहुंचे। नैनीताल में उन्होंने उत्तराखंड हाईकोर्ट भी जाकर करीब आधे घंटे तक वकीलों से बातचीत की। परिजनों के अनुसार, उस दौरान वह काफी परेशान नजर आ रहे थे, हालांकि परिवार को अंदेशा नहीं था कि वह इतना बड़ा कदम उठा लेंगे। 10 जनवरी की रात होटल में क्या हुआ 10 जनवरी को लौटते समय रास्ते में उनके बेटे की तबीयत खराब हुई, जिसके बाद परिवार गौलापार स्थित देवभूमि होटल में रुका। रात करीब 1:30 बजे कमरे के अंदर विवाद हुआ। पत्नी के मुताबिक उस दौरान सुखवंत सिंह काफी गुस्से में थे। पत्नी और बेटा जान बचाकर रिसेप्शन की ओर भागे। कुछ ही देर बाद कमरे के अंदर से गोली चलने की आवाज आई। सूचना पर पुलिस पहुंची और सुखवंत सिंह को अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मरने से पहले वीडियो और 6 पन्नों का दस्तावेज आत्महत्या से पहले सुखवंत सिंह ने फेसबुक लाइव वीडियो बनाया, जिसमें उन्होंने जमीन धोखाधड़ी, पुलिस पर उत्पीड़न और मिलीभगत के आरोप लगाए। उन्होंने साफ कहा कि उन्हें उत्तराखंड पुलिस पर भरोसा नहीं है और पूरे मामले की जांच केवल CBI से कराई जाए। एसएसपी के मुताबिक, मरने से पहले सुखवंत सिंह ने अपनी पत्नी को छह पन्नों का एक दस्तावेज भी सौंपा था और कहा था कि इसे अगले दिन पुलिस को देना। उस वक्त पत्नी को यह अंदाजा नहीं था कि वह आत्महत्या कर लेंगे।
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