Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    दावा- ईरान पर कभी भी हमला कर सकता है अमेरिका:ये मिलिट्री ऑपरेशन कई हफ्ते चलेगा, वेनेजुएला से भी खतरनाक कार्रवाई होगी

    9 hours ago

    अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बहुत तेजी से बढ़ गया है और अब हालात ऐसे बन गए हैं कि आने वाले दिनों या हफ्तों में बड़ा सैन्य टकराव हो सकता है। अमेरिकी न्यूज एजेंसी Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर अमेरिका सैन्य कार्रवाई करता है तो वह छोटी या प्रतीकात्मक कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि कई हफ्तों तक चलने वाला बड़ा ऑपरेशन होगा। एक व्हाइट हाउस अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि आने वाले हफ्तों में हमले की संभावना 90% तक है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह ऑपरेशन पिछले महीने वेनेजुएला में हुई सीमित कार्रवाई से कहीं बड़ा होगा और संभव है कि इसे इजराइल के साथ मिलकर अंजाम दिया जाए। इसका निशाना ईरान का परमाणु और मिसाइल ढांचा हो सकता है। इजराइल अधिकारी बोले- संघर्ष की बहुत ज्यादा आशंका इजराइल की सैन्य खुफिया एजेंसी के पूर्व प्रमुख आमोस यादलिन ने कहा कि टकराव अब पहले से कहीं ज्यादा करीब है। हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं, लेकिन एक महाशक्ति कुछ ही दिनों में युद्ध शुरू नहीं करती। कूटनीतिक रास्ता अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। यादलिन ने यह भी कहा कि कई लोग हमले के खिलाफ हैं और पेंटागन भी पूरी तरह साफ नहीं है कि वह इस कार्रवाई से क्या हासिल करना चाहता है, लेकिन राष्ट्रपति काफी दृढ़ नजर आ रहे हैं। ट्रम्प का 'सभी ऑप्शन खुले हैं' वाला बयान असली सैन्य तैयारी के बारे में बताता है। लड़ाई खत्म करने की डिप्लोमैटिक कोशिशें जारी दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने परमाणु कूटनीति के साथ-साथ बड़े स्तर पर सैन्य तैयारी भी शुरू कर दी है। मंगलवार को उनके सलाहकार जेराड कुशनर और स्टीव विटकॉफ ने जिनेवा में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से तीन घंटे तक बातचीत की। दोनों पक्षों ने कहा कि बातचीत में कुछ डेवलपमेंट हुआ है, लेकिन अमेरिकी अधिकारी अब भी कुछ बड़े मुद्दों पर सहमति बनने को लेकर डाउट में हैं। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि कुछ मामलों में बातचीत अच्छी रही, लेकिन कई मुद्दों पर राष्ट्रपति ने जो 'रेड लाइन' तय की हैं, उन्हें ईरान मानने को तैयार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति समझौता चाहते हैं, लेकिन यह भी संभव है कि कूटनीति अपनी अंतिम सीमा तक पहुंच चुकी हो। अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य तैनाती बढ़ाई रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य-पूर्व में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी काफी बड़ी हो चुकी है। दो एयरक्राफ्ट कैरियर, करीब एक दर्जन युद्धपोत, सैकड़ों फाइटर जेट और कई एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किए गए हैं और और भी सैन्य उपकरण भेजे जा रहे हैं। ओपन-सोर्स ट्रैकिंग के मुताबिक 150 से ज्यादा कार्गो उड़ानें हथियार और गोला-बारूद लेकर क्षेत्र में पहुंची हैं। साथ ही 50 से ज्यादा फाइटर जेट, जिनमें F-35, F-22 और F-16 शामिल हैं, मिडिल ईस्ट की ओर भेजे गए हैं। ट्रम्प के एक एक एडवाइजर ने कहा कि कुछ लोग राष्ट्रपति को ईरान से युद्ध न करने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन उन्हें लगता है कि आने वाले कुछ हफ्तों में सैन्य कार्रवाई की संभावना 90% है। इजराइल के दो अधिकारियों ने भी कहा कि देश 'कुछ ही दिनों में' युद्ध की स्थिति के लिए तैयारी कर रहा है और ऐसी कार्रवाई की वकालत कर रहा है जो ईरान की सत्ता को चुनौती दे सके। रूस ने ईरान के साथ नेवी एक्सरसाइज का ऐलान किया रिपोर्ट में याद दिलाया गया कि जून 2025 में ईरानी मिसाइलों से 32 लोगों की मौत हुई थी और 3,000 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। लिकुड पार्टी के सांसद बोआज बिस्मुथ ने कहा कि इजराइल का कोई भी नागरिक ऐसा नहीं है जो दिन में कई बार यह न सोचता हो कि ईरान के साथ संघर्ष कब होगा। उन्होंने कहा कि जनता और सरकार दोनों अलग-अलग संभावित हालात के लिए तैयार हैं। इस बीच ईरान और रूस ने ओमान सागर और उत्तरी हिंद महासागर में संयुक्त नौसैनिक अभ्यास करने का ऐलान किया है। वहीं ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने होरमुज स्ट्रैट के पास सैन्य अभ्यास किया और कुछ घंटों के लिए वहां आवाजाही आंशिक रूप से रोक दी। हॉर्मुज स्ट्रैट दुनिया के तेल कारोबार के लिए अहम रास्ता हॉर्मुज स्ट्रैट अपनी सबसे संकरी जगह पर करीब 33 किलोमीटर (21 मील) चौड़ा है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे वैश्विक बाजारों से जोड़ता है। दुनिया की करीब 20% तेल सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है। सऊदी अरब, कुवैत, इराक, कतर, बहरीन, यूएई और ईरान का तेल और गैस यहीं से बाहर जाता है। ज्यादातर खेप एशिया के लिए होती है। अमेरिकी एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार, इस रास्ते का कोई व्यावहारिक विकल्प नहीं है, हालांकि सऊदी अरब और यूएई ने कुछ पाइपलाइन बनाई हैं जो इस मार्ग को बायपास करती हैं। हालांकि स्ट्रैट को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग माना जाता है और सभी जहाजों के लिए खुला है, लेकिन इसके किनारों के क्षेत्रीय पानी पर ईरान और ओमान का नियंत्रण है। ईरान-अमेरिका के बीच बैलिस्टिक मिसाइल पर विवाद अटका ईरान और अमेरिका के बीच चल रही परमाणु समझौते की बातचीत में बैलिस्टिक मिसाइल प्रोजेक्ट सबसे बड़ा विवाद का मुद्दा बन गया है। ईरान इस पर बिल्कुल भी समझौता करने को तैयार नहीं है और इसे अपनी रेड लाइन मानता है। ईरान का कहना है कि यह उसके बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम रक्षा के लिए जरूरी है। ईरान का कहना है कि जून 2025 में इजराइल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु साइटों पर हमला किया, तब ईरान की मिसाइलों ने ही उसकी रक्षा की। इसके साथ ही अमेरिका चाहता है कि ईरान हिजबुल्लाह, हूती जैसे प्रॉक्सी ग्रुप्स को समर्थन देना बंद करे। अमेरिका इस मुद्दे को भी शामिल करना चाहता है, लेकिन ईरान मुख्य रूप से सिर्फ परमाणु मुद्दे पर फोकस रखना चाहता है। ईरानी अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि मिसाइल कार्यक्रम पर कोई बात नहीं होगी। यह ईरान की रक्षात्मक क्षमता है और इसे छोड़ना मतलब खुद को कमजोर करना होगा। ईरान कहता है कि बातचीत सिर्फ परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रहेगी, मिसाइल या क्षेत्रीय समूहों पर नहीं। -------------- यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले- ईरान के साथ बातचीत में इनडायरेक्टली शामिल रहूंगा:पिछले साल परमाणु ठिकानों पर बमबारी से इन्हें अक्ल आई; आज स्विट्जरलैंड में बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को कहा कि वह अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत में इनडायरेक्ट रूप से शामिल रहेंगे। उन्होंने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह बात कही। पढ़ें पूरी खबर…
    Click here to Read More
    Previous Article
    HUL to invest Rs 2,000 crore to boost premium category capacity
    Next Article
    Capricorn Horoscope Today, February 19, 2026: Career decisions require courage and patience

    Related दुनिया Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment