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    ट्रम्प बोले- मुझे नहीं पता मैं कब तक जिंदा रहूंगा:बहुत लोगों की गोली के निशाने पर; दो दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति के रिजॉर्ट में घुसा था शख्स

    9 hours ago

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को व्हॉइट हाउस में प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि, वह कब तक जिंदा रहेंगे यह उन्हें भी नहीं पता। क्योंकि वे बहुत लोगों की गोली के निशाने पर हैं। ट्रम्प के इस बयान को दो दिन पहले उनके रिजॉर्ट में हुई घुसपैठ से जोड़ा जा रहा है। दरअसल रविवार को एक शख्स डोनाल्ड ट्रम्प के मार-ए-लागो रिजॉर्ट में घुसने की कोशिश कर रहा था। सुरक्षाकर्मियों ने गोली मार दी। उसकी मौके पर ही मौत हो गई है। घटना स्थानीय समयानुसार रविवार आधी रात 1:30 बजे हुई। राष्ट्रपति की सुरक्षा करने वाली एजेंसी सीक्रेट सर्विस ने बताया कि युवक गैरकानूनी तरीके से सुरक्षित इलाके में घुसने की कोशिश कर रहा था। वह अपने साथ शॉटगन और फ्यूल केन लेकर आया था। मारे गए युवक की उम्र 20 साल थी, वह नॉर्थ कैरोलीना का रहने वाला था। फिलहाल उसकी पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। मामले की जांच जारी है। घटना के वक्त राष्ट्रपति ट्रम्प वॉशिंगटन डीसी में व्हाइट हाउस में मौजूद थे। आमतौर पर वह वीकेंड पर मार-ए-लागो में समय बिताते हैं। कार की आड़ में अंदर घुसने की कोशिश की सीक्रेट सर्विस के अधिकारियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि रिजॉर्ट के नॉर्थ गेट से एक कार के बाहर निकल रही थी, इसी दौरान युवक ने अंदर घुसने की कोशिश की। उसके पास शॉटगन और फ्यूल केन थी। सीक्रेट सर्विस के दो एजेंट्स ने उसे रोका और उससे हथियार और केन गिराने को कहा गया। युवक ने केन तो रख दिया, लेकिन शॉटगन को गोली चलाने की पोजिशन में उठा लिया। इसके बाद सुरक्षा कर्मियों ने गोली चलाई और वह मारा गया। जांच में पता चला कि उसके परिवार ने कुछ दिन पहले उसे लापता होने की रिपोर्ट की थी। वह नॉर्थ कैरोलीना से साउथ की ओर आया था और रास्ते में शॉटगन खरीदा। उसकी कार में गन का डिब्बा मिला है। ट्रम्प को चुनावी रैली में गोली मारी थी ट्रम्प की सुरक्षा में पहले भी चूक हो चुकी है। 13 जुलाई 2024 में ट्रम्प को एक रैली के दौरान एक हमलावर ने गोली मार दी थी। उस वक्त वे राष्ट्रपति नहीं थे। उन पर यह हमला राष्ट्रपति चुनाव से ठीक 4 महीने पहले हुआ था। 20 साल के हमलावर ने 400 फीट की दूरी से ट्रम्प पर असॉल्ट राइफल से गोली चलाई थी। यह गोली उनके कान को छूते हुए गुजरी थी। इसके बाद ट्रम्प की सुरक्षा में तैनात सीक्रेट सर्विस के स्नाइपर्स ने हमलावर को तुरंत ढेर कर दिया था। सीक्रेट सर्विस के पास राष्ट्रपति की सुरक्षा की जिम्मेदारी अमेरिका में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति की सुरक्षा का जिम्मा यूनाइटेड स्टेट्स सीक्रेट सर्विस (USSS) के पास होता है। यह एक फेडरल एजेंसी है, जो होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट के तहत काम करती है। सीक्रेट सर्विस की शुरुआत 1865 में हुई थी। शुरू में इसका मुख्य काम नकली नोट रोकना था। लेकिन 1901 में राष्ट्रपति विलियम मैकिन्ले की हत्या के बाद संसद ने इसे राष्ट्रपति की सुरक्षा का काम सौंप दिया। 1902 से यह सीक्रेट सर्विस की फुल-टाइम जिम्मेदारी बन गई। 1906 में कांग्रेस ने इसके लिए फंड्स और कानूनी अधिकार दिए। किन-किनकी सुरक्षा करती है सीक्रेट सर्विस? राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति (उनके परिवार) राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति बनने वाले उम्मीदवार पूर्व राष्ट्रपति (जीवन भर), उनकी पत्नी और 16 साल से कम उम्र के बच्चे विदेशी राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख (जो अमेरिका आते हैं) राष्ट्रपति पद के प्रमुख उम्मीदवार और उनकी पत्नी राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के लिए यह सुरक्षा अनिवार्य है। वे इसे मना नहीं कर सकते। बाकी लोग मना कर सकते हैं। सीक्रेट सर्विस कैसे काम करती है? सीक्रेट सर्विस के स्पेशल एजेंट्स हमेशा तैनात रहते हैं। जब भी कोई अमेरिकी राष्ट्रपति कहीं जाता है, घर में रहता है या विदेश यात्रा करता है तो सीक्रेट सर्विस ही उसकी पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करती है। एजेंट्स पहले से जगह का सर्वे करते हैं, खतरे की जानकारी इकट्ठा करते हैं और हर संभावित जोखिम को पहले ही रोकने की कोशिश करते हैं। ट्रम्प केरिजॉर्टमें एंट्री के लिए मेंबरशिप जरूरी ट्रम्प के रिजॉर्ट में बिना कार्ड यहां एंट्री नहीं होती। इसकी लाइफटाइम मेंबरशिप फीस 8.50 करोड़ रुपए है। पैसा होने पर भी सभी को मेंबरशिप नहीं मिलती है। इसके लिए पहले उसकी हिस्ट्री चेक होती है। मसलन बैंक अकाउंट डिटेल, सोशल स्टेट्स और फैमिली बैकग्राउंड। न्यूज एजेंसी AFP के मुताबिक हर साल बड़ी संख्या में दुनिया भर के अमीर लोग इसके लिए अप्लाई करते हैं, लेकिन कुछ को ही मेंबरशिप मिलती है। ----------------------------- ये खबर भी पढ़ें… टैरिफ में बदलाव से भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बैठक टली:इसमें भारत पर 18% टैरिफ लगना था, अब ट्रम्प ने खुद ही ग्लोबल टैरिफ 15% किया भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते (ITA) को लेकर होने वाली बैठक टल गई है। यह जानकारी न्यूज एजेंसी PTI ने सरकारी सूत्रों के हवाले से दी। बैठक 23-26 फरवरी को वॉशिंगटन में होनी थी। दरअसल समझौते में भारत को 18% टैरिफ देना था, लेकिन शुक्रवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने सभी ग्लोबल टैरिफ रद्द कर दिए थे। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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