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    टॉप-10 कंपनियों में 8 की वैल्यू ₹2.81 लाख करोड़ घटी:SBI टॉप लूजर रहा, इसकी वैल्यू ₹53,953 करोड़ घटी; ICICI और HDFC बैंक का मार्केट कैप भी घटा

    3 days ago

    मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से देश की 10 सबसे बड़ी कंपनियों में से 8 की वैल्यू बीते हफ्ते के कारोबार में 2.81 लाख करोड़ रुपए घट गई। इस दौरान SBI की वैल्यू सबसे ज्यादा घटी। SBI का मार्केट कैप 53,953 करोड़ रुपए घटकर ₹10.55 लाख करोड़ पर आ गया। ICICI बैंक की मार्केट वैल्यू ₹46,937 करोड़ घटकर ₹9.40 लाख करोड़ पर आ गई। वहीं HDFC बैंक का मार्केट कैप 46,552 करोड़ रुपए घटकर ₹13.19 लाख करोड़ पर आ गया। रिलायंस और इंफोसिस की वैल्यू बढ़ी इनके अलावा लार्सन एंड टुब्रो, बजाज फाइनेंस, TCS, HUL और भारती एयरटेल का मर्केट कैप भी घटा। बीते हफ्ते सिर्फ रिलायंस इंडस्ट्रीज और इंफोसिस की वैल्यू बढ़ी। रिलायंस का मार्केट कैप 14,750 करोड़ रुपए बढ़कर 19.01 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया। इंफोसिस की मार्केट वैल्यू 3,459 करोड़ रुपए बढ़कर 5.30 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गई। शुक्रवार को सेंसेक्स 1097 अंक गिरा था शेयर बाजार में शुक्रवार, 6 मार्च को गिरावट रही थी। सेंसेक्स 1097 अंक (1.37%) गिरकर 78,919 पर बंद हुआ था। निफ्टी में भी 315 अंक (1.27%) की गिरावट रही। ये 24,450 पर आ गया। जियोपॉलिटिकल तनाव और जंग जैसी स्थिति में महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है। इससे कंपनियों का मुनाफा कम हो सकता है। ऐसे में निवेशक उनके शेयर बेचना शुरू कर देते हैं और इसे सोने-चांदी जैसी सुरक्षित जगह निवेश करते हैं। इससे बाजार में गिरावट आती है। मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या होता है? मार्केट कैप किसी भी कंपनी के टोटल आउटस्टैंडिंग शेयरों यानी वे सभी शेयर जो फिलहाल उसके शेयरहोल्डर्स के पास हैं, उनकी वैल्यू है। इसका कैलकुलेशन कंपनी के जारी शेयरों की कुल संख्या को उनकी कीमत से गुणा करके किया जाता है। इसे एक उदाहरण से समझें... मान लीजिए... कंपनी 'A' के 1 करोड़ शेयर मार्केट में लोगों ने खरीद रखे हैं। अगर एक शेयर की कीमत 20 रुपए है, तो कंपनी की मार्केट वैल्यू 1 करोड़ x 20 यानी 20 करोड़ रुपए होगी। कंपनियों की मार्केट वैल्यू शेयर की कीमतों के बढ़ने या घटने के चलते बढ़ता-घटता है। इसके और कई कारण हैं... मार्केट कैप के उतार-चढ़ाव का कंपनी और निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ता है? कंपनी पर असर : बड़ा मार्केट कैप कंपनी को मार्केट से फंड जुटाने, लोन लेने या अन्य कंपनी एक्वायर करने में मदद करता है। वहीं, छोटे या कम मार्केट कैप से कंपनी की फाइनेंशियल डिसीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है। निवेशकों पर असर : मार्केट कैप बढ़ने से निवेशकों को डायरेक्ट फायदा होता है। क्योंकि उनके शेयरों की कीमत बढ़ जाती है। वही, गिरावट से नुकसान हो सकता है, जिससे निवेशक शेयर बेचने का फैसला ले सकते हैं। उदाहरण: अगर TCS का मार्केट कैप ₹12.43 लाख करोड़ से बढ़ता है, तो निवेशकों की संपत्ति बढ़ेगी, और कंपनी को भविष्य में निवेश के लिए ज्यादा पूंजी मिल सकती है। लेकिन अगर मार्केट कैप गिरता है तो इसका नुकसान हो सकता है।
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