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    सुप्रीम कोर्ट केंद्र से बोला-वांगचुक की हिरासत पर विचार करें:दलीलों के अलावा भी सोचिए, उनकी तबीयत ठीक नहीं, जेल में 5 महीने हो गए

    1 month ago

    सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार से कहा कि वह क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को NSA के तहत हिरासत में रखने के अपने फैसले पर फिर से विचार करे। जस्टिस अरविंद कुमार और पी बी वराले की बेंच ने कहा कि वांगचुक की हेल्थ रिपोर्ट अच्छी नहीं है। कोर्ट ने केंद्र की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज से इस मामले में विचार करने के लिए कहा। कोर्ट ने कहा- दलीलों और कानून के बिंदुओं के अलावा, कोर्ट के अधिकारी के तौर पर इस पर थोड़ा सोचिए। हिरासत का आदेश 26 सितंबर, 2025 को पारित किया गया था, लगभग पांच महीने हो गए हैं। इसपर नटराज ने कहा कि वह यह सुझाव संबंधित अधिकारियों के सामने रखेंगे। दरअसल, 24 सितंबर 2025 को लेह में हुई हिंसा भड़काने के आरोप में 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत वांगचुक को पुलिस ने हिरासत में लिया गया था। तब से वे जोधपुर जेल में हैं। सरकार की दलीलें… NSA कानून क्या कहता है राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) निवारक हिरासत का कानून है। इसके तहत किसी व्यक्ति को बिना किसी आपराधिक मुकदमे के हिरासत में लिया जा सकता है, अगर प्रशासन को आशंका हो कि वह भविष्य में सार्वजनिक व्यवस्था या देश की सुरक्षा को नुकसान पहुंचा सकता है। हिरासत का आदेश जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस आयुक्त जारी करता है। इस आदेश को 12 दिन के भीतर राज्य सरकार की मंजूरी मिलनी जरूरी होती है। इसके बाद मामला सलाहकार बोर्ड के पास जाता है, जो हिरासत के आधारों की समीक्षा करता है। NSA के तहत हिरासत अधिकतम 12 महीने तक ही रखी जा सकती है। वांगचुक 5 महीने से हिरासत में कैसे है? सोनम वांगचुक के खिलाफ NSA के तहत हिरासत आदेश 26 सितंबर 2025 को जारी हुआ था। इसके बाद राज्य सरकार ने तय समय के भीतर आदेश को मंजूरी दी। सलाहकार बोर्ड ने भी अपनी रिपोर्ट सरकार को दे दी है। कानून के मुताबिक, जब तक 12 महीने की अधिकतम अवधि पूरी न हो जाए, सरकार हिरासत वापस न ले ले या अदालत आदेश रद्द न कर दे, तब तक हिरासत जारी रह सकती है। 3 फरवरी: सरकार बोली-वांगचुक बॉर्डर एरिया में लोगों को भड़का रहे थे केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि सोनम वांगचुक को इसलिए हिरासत में लिया गया, क्योंकि वे पाकिस्तान और चीन से सटे संवेदनशील बॉर्डर इलाके में लोगों को भड़का रहे थे। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी.बी. वराले की बेंच लद्दाख हिंसा से जुड़े मामले में वांगचुक की गिरफ्तारी के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पूरी खबर पढ़ें… 2 फरवरी: सरकार बोली– वांगचुक लद्दाख को नेपाल-बांग्लादेश बनाना चाहते थे केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि सोनम वांगचुक लद्दाख को नेपाल या बांग्लादेश जैसा बनाना चाहते हैं। ऐसे व्यक्ति को और जहर उगलने की इजाजत नहीं दी जा सकती। मेहता ने कहा कि नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे उदाहरण देना, युवाओं को भड़काने और देश की एकता के खिलाफ माहौल बनाने के बराबर है। पूरी खबर पढ़ें… पत्नी गीतांजलि बोली थीं- अधिकारियों ने सही फैसला नहीं किया इससे पहले वांगचुक की पत्नी गीताांजलि अंग्मो ने 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि उनके पति को हिरासत में लेने के फैसले में अधिकारियों ने ठीक से सोच-विचार नहीं किया। उन्हें बेकार व गैर-जरूरी बातों के आधार पर नजरबंद किया गया। अंग्मो की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच में दावा किया कि जिन चार वीडियो के आधार पर नजरबंदी की गई वे सोनम वांगचुक को दिए ही नहीं गए। इससे उनका अपना बचाव में सही ढंग से बात रखने का अधिकार छिन गया। वीडियो नहीं देने से वांगचुक का सलाहकार बोर्ड और सरकार के सामने अपनी बात रखने का अधिकार प्रभावित हुआ है। पूरी खबर पढ़ें… सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था। वह लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर आन्दोलन कर रहे थे। आन्दोलन के दौरान हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद उनकी गिरफ्तारी की गई थी। इन प्रदर्शनों में चार लोगों की मौत हुई थी और 90 लोग घायल हुए थे। सरकार का आरोप है कि वांगचुक ने इस हिंसा को भड़काया। NSA सरकार को ऐसे लोगों को हिरासत में लेने का अधिकार देता है, जिनसे देश की सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा हो। इसके तहत किसी व्यक्ति को अधिकतम 12 महीने तक नजरबंद रखा जा सकता है। अंग्मो ने कहा कि 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा का सोनम वांगचुक के बयानों या कामों से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने बताया कि वांगचुक ने खुद सोशल मीडिया पर हिंसा की निंदा की थी और कहा था कि हिंसा से लद्दाख का शांतिपूर्ण आंदोलन विफल हो जाएगा। दरअसल लद्दाख पहले जम्मू-कश्मीर राज्य का हिस्सा था। 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने यहां से धारा 370 और 35 ए को हटाकर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग राज्य बनाया था। जम्मू-कश्मीर को विधानसभा वाला राज्य बनाया था, जिसका प्रशासन राज्य सरकार के पास और सुरक्षा व्यवस्था केंद्र सरकार के पास है, जबकि लद्दाख को पूरी तरह केंद्र शासित राज्य बनाया था। -------------- ये खबर भी पढ़ें… वांगचुक की पत्नी बोलीं-सोनम जेल में फर्श पर सो रहे:बैरक में टहलने तक की जगह नहीं, सरकार जानती हैं उनके केस में दम नहीं लद्दाख के एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने कहा कि सोनम को जेल में फर्श पर कंबल में सोना पड़ा रहा है। उनके पास कोई फर्नीचर नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके बैरक में इतनी भी जगह नहीं है कि वे ठीक से टहल सकें। आंगमे ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल तारीख पर तारीख मांग रहे हैं क्योंकि उन्हें एहसास हो गया है कि केस में कोई दम नहीं है। पूरी खबर पढ़ें…
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