Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    सुप्रीम कोर्ट बोला-अपराधी की सजा घटाकर मुआवजा बढ़ाना खतरनाक ट्रेंड:आरोपी पैसा देकर बच नहीं सकते हैं; मदुरै हाइकोर्ट का फैसला रद्द

    17 hours ago

    सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर अपराधों में किसी की सजा घटाकर मुआवजा बढ़ाने को खतरनाक ट्रेंड बताया। मदुरै हाइकोर्ट के एक फैसले पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि इससे समाज में गलत संदेश जाता है कि आरोपी सिर्फ पैसा देकर अपनी जिम्मेदारी से बच सकते हैं। जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने कहा कि सजा का उद्देश्य अपराध के प्रति डर पैदा करना है, ताकि भविष्य में अपराध रोके जा सकें। सजा न तो अत्यधिक कठोर होनी चाहिए और न इतनी नरम कि उसका भय खत्म हो जाए। दरअसल, सुप्रीण कोर्ट मद्रास हाइकोर्च की मदुरै बेंच के एक फैसले के खिलाफ दायर हुई याचिका पर सुनवाई कर रहा था। हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति पर चाकू से हमला कर गंभीर चोट पहुंचाने के मामले में दो आरोपियों को ट्रायल कोर्ट से मिली तीन साल की सजा घटाकर 5-5 हजार रुपए के मुआवजे को बढ़ाकर 50-50 हजार रुपए कर दिया था। शीर्ष अदलात ने ये फैसला रद्द कर दिया। मुआवजा सजा का विकल्प नहीं पीठ ने स्पष्ट किया कि पीड़ित को मुआवजा देना महत्वपूर्ण है, लेकिन यह सजा का विकल्प नहीं हो सकता। भारतीय न्याय प्रणाली बदले पर नहीं, बल्कि सुधार और पुनर्स्थापन के सिद्धांत पर आधारित है। कोर्ट ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 395 में पीड़ित को मुआवजा देने का प्रावधान है, लेकिन यह सजा के अतिरिक्त है, ये सजा की जगह नहीं ले सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सजा सुनाते समय अदालतों को इन बिंदुओं पर विचार करना चाहिए: आरोपियों को चार हफ्ते में सरेंडर का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश रद्द करते हुए ट्रायल कोर्ट की तीन साल की सजा बहाल कर दी। साथ ही निर्देश दिया कि आरोपी चार सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करें और शेष सजा काटें। ट्रायल कोर्ट को पहले से काटी गई अवधि का समायोजन करने के निर्देश भी दिए गए। ---------------- ये खबर भी पढ़ें… SC बोला-नेताओं को भाषण से पहले विचार सुधारने की जरूरत:उन्हें देश में भाईचारा बढ़ाना चाहिए; वैचारिक सिद्धांतों पर चुनाव लड़ें लेकिन आपसी सम्मान भी जरूरी सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को हेट स्पीच से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई की। इस दौरान नेताओं और उच्च संवैधानिक पद पर बैठे अधिकारियों को देश में भाईचारा बढ़ाने और संविधान के मूल्यों के हिसाब से व्यवहार करने और बोलने की नसीहत दी। बेंच ने कहा- नेताओं को देश में भाईचारा बढ़ाना होगा। नफरत भरे भाषणों को रोकने के लिए पहले सोच को सुधारने की आवश्यकता है। क्योंकि भाषण से पहले विचार आते हैं। पूरी खबर पढ़ें…
    Click here to Read More
    Previous Article
    ओडिशा के कोणार्क मंदिर के गर्भगृह में जा सकेंगे श्रद्धालु:122 साल से भरी रेत हटाई जा रही; इसमें 3 महीने लगेंगे
    Next Article
    Financial horoscope 2026: who needs to be careful with money

    Related भारत Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment