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    रिंकू सिंह T-20 वर्ल्ड कप छोड़कर अचानक घर लौटे:पिता नोएडा के अस्पताल में भर्ती; जिम्बाब्वे के खिलाफ खेलना तय नहीं

    12 hours ago

    भारतीय टीम के बल्लेबाज रिंकू सिंह मंगलवार को चेन्नई से घर अलीगढ़ लौट आए हैं। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के सूत्रों के हवाले से बताया कि परिवार में कुछ इमरजेंसी है। जिसकी वजह से रिंकू को घर लौटना पड़ा। एजेंसी के मुताबिक, रिंकू के पिता खानचंद सिंह नोएडा के अस्पताल में भर्ती हैं। उनकी हालत गंभीर है। भारत को अब 26 फरवरी को जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच खेलना है। लेकिन, इस मैच में रिंकू का खेलना अब तय नहीं है। अभ्यास सत्र में नहीं लिया हिस्सा भारत और जिम्बाब्वे के बीच सुपर-8 का मुकाबला गुरुवार को चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेला जाना है। रिंकू ने मंगलवार को ट्रेनिंग सेशन में हिस्सा नहीं लिया, जबकि टीम के अन्य खिलाड़ी नेट्स पर मौजूद रहे। भारत के लिए यह मुकाबला काफी अहम है, क्योंकि भारतीय टीम को यह मैच बड़े अंतर से जीतना है। जिम्बाब्वे इस टूर्नामेंट में अच्छा खेली है। वह 2 उलटफेर भी कर चुकी है। वर्ल्डकप के 5 मैच में 24 रन ही बना सके रिंकू रिंकू सिंह भारतीय टीम में छठे या सातवें नंबर पर बैटिंग करते हैं। उन्हें टीम फिनिशर के तौर पर इस्तेमाल करती है। हालांकि, मौजूदा वर्ल्ड कप रिंकू के लिए अच्छा नहीं रहा है। वे इस टूर्नामेंट में 5 मैच में 24 रन ही बना सके हैं। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पिछले मैच में तो वे खाता भी नहीं खोल सके थे। टूर्नामेंट में उनका स्कोर क्रमश: 6, 1, 11, 6 और 0 रहा है। रिंकू पाकिस्तान और नीदरलैंड के खिलाफ वे नाबाद रहे थे। पिता गैस सिलेंडर डिलीवरी का काम करते थे क्रिकेटर रिंकू का बचपन काफी कठिनाई भरा रहा है। KKR को दिए एक इंटरव्यू में रिंकू ने अपनी जिंदगी के बारे में बात की थी। उन्होंने बताया था- परिवार में 5 भाई हैं। पापा सिलेंडर डिलीवरी का काम करते थे। हम पांचों भाइयों से भी काम करवाते, जब कोई नहीं मिलता तो डंडे से पीटते थे। हम सारे भाई बाइक पर 2-2 सिलेंडर रखकर होटलों और घरों में डिलीवर करने जाते थे। सभी ने पापा को भी सपोर्ट किया और जहां भी मैच होते तो सारे भाई एक साथ ही खेलने जाते थे। मोहल्ले में 6-7 और लड़के थे, जिनके साथ पैसे मिलाकर गेंद लाते थे। टेनिस और लेदर बॉल से क्रिकेट खेलना शुरू किया था। UP के अलीगढ़ में मॉडर्न स्कूल से भी क्रिकेट खेला। इंटर स्कूल टूर्नामेंट में 32 बॉल पर 54 रन की नॉटआउट पारी खेली। शुरुआत में क्लब क्रिकेट खेलने का पैसा नहीं था तो सरकारी स्टेडियम में कार्ड बनवाकर प्रैक्टिस करता था। मैच खेलने के लिए पैसे लगते, घरवालों से मांगो तो कहते थे कि पढ़ाई करो। पापा खेलने के लिए हमेशा मना करते थे, मम्मी थोड़ा सपोर्ट करती थीं। शहर के पास एक टूर्नामेंट हुआ, उसके लिए पैसे चाहिए थे। मम्मी ने दुकान से एक हजार रुपए उधार लेकर दिए थे। ---------------------
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