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    PM मोदी का 9 साल बाद इजराइल दौरा:संसद को संबोधित करेंगे, विपक्ष ने बहिष्कार की धमकी दी; हथियार डील पर बातचीत संभव

    9 hours ago

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दो दिन के इजराइल दौरे पर रवाना होंगे। यह उनकी बीते 9 साल में दूसरी इजराइल यात्रा है। इससे पहले वे जुलाई 2017 में गए थे। बुधवार को राजधानी तेल अवीव पहुंचने के बाद PM मोदी नेतन्याहू के साथ प्राइवेट बातचीत करेंगे। मोदी आज इजराइल की संसद को भी संबोधित करेंगे। ऐसा करने वाले वे पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे। इसके अलावा वे भारतीय समुदाय के कार्यक्रम में भी शामिल होंगे और टेक्नोलॉजी प्रदर्शनी का दौरा करेंगे। मोदी के इस दौरे पर भारत और इजराइल के हथियारों से जुड़ी डील पर बातचीत की संभावना है। इनमें ड्रोन और एंटी बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम शामिल हैं। इससे पहले नेतन्याहू ने रविवार को कहा था कि वे अपने प्रिय मित्र के इजराइल आने का इंतजार कर रहे हैं। मोदी के भाषण का बहिष्कार कर सकता है इजराइली विपक्ष इजराइली संसद में होने वाला मोदी का भाषण घरेलू राजनीति के विवाद में घिर गया है। इजराइल का विपक्ष बुधवार को संसद के विशेष सत्र का बहिष्कार करने की योजना बना रहा है। विवाद सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस आइजैक अमीत को आमंत्रित न किए जाने को लेकर है। इजराइली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संसद स्पीकर अमीर ओहाना ने विशेष सत्र में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को आमंत्रित नहीं किया है। परंपरा के मुताबिक ऐसे औपचारिक सत्रों में चीफ जस्टिस को बुलाया जाता है। इसे लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव तेज हो गया है। विपक्षी नेता और पूर्व प्रधानमंत्री येर लैपिड ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने एक्स पर लिखा कि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस का बहिष्कार दरअसल विपक्ष का भी बहिष्कार है। लैपिड ने कहा कि वे भारत को शर्मिंदा नहीं करना चाहते, जहां 1.5 अरब आबादी वाले देश का प्रधानमंत्री आधी खाली संसद को संबोधित करे। कल यहूदियों के नरसंहार से जुड़े स्मारक जाएंगे मोदी दौरे के दूसरे दिन मोदी 26 फरवरी को इजराइल के ऐतिहासिक होलोकॉस्ट स्मारक ‘यद वाशेम’ जाएंगे। यह स्मारक जर्मनी में हिटलर के नाजी शासन में मारे गए 60 लाख से अधिक यहूदियों की याद में बना है। इनमें करीब 15 लाख बच्चे भी शामिल थे। स्मारक परिसर में पीड़ितों के नामों, दस्तावेजों और ऐतिहासिक अभिलेखों का विशाल संग्रह है। यहां रखी ‘बुक ऑफ नेम्स’ में लाखों पीड़ितों का विवरण दर्ज है। प्रधानमंत्री इन अभिलेखों का अवलोकन करेंगे और होलोकॉस्ट के पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। यद वाशेम के बाद प्रधानमंत्री मोदी इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग से मुलाकात करेंगे। बैठक में राजनीतिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा होगी। दोनों नेता क्षेत्रीय स्थिरता, पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा करेंगे। भारत-इजराइल के बीच ड्रोन डील संभव राष्ट्रपति से मुलाकात के तुरंत बाद मोदी, नेतन्याहू के साथ बैठक में शामिल होंगे। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान भारत और इजराइल के बीच ड्रोन की खरीद और जॉइंट मैन्युफैक्चरिंग समेत कई बड़े रक्षा समझौतों पर सहमति बन सकती है। फोर्ब्स इंडिया के मुताबिक 2026 में दोनों देशों के बीच 8.6 अरब डॉलर का रक्षा समझौता संभव है। इसमें प्रिसीजन गाइडेड बम और मिसाइल सिस्टम के साथ एडवांस ड्रोन भी शामिल हो सकते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार भारत हैरोन MK-2 MALE ड्रोन खरीदने की योजना बना रहा है। यह ड्रोन 45 घंटे तक लगातार उड़ान भर सकता है, 470 किलोग्राम भार उठा सकता है और 35 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है। इसके अलावा आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC), व्यापार और निवेश, एडवांस टेक्नोलॉजी व इनोवेशन में जैसे मुद्दों पर भी बातचीत संभव हैं। हालांकि संभावित समझौतों को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। आयरन डोम डिफेंस सिस्टम पर भी बात हो सकती है इजराइल भारत के साथ अपने एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम आयरन डोम की टेक्नोलॉजी शेयर कर सकता है। यह जानकारी मुंबई में IANS को दिए इंटरव्यू में इजराइल के कॉन्सुल जनरल यानिव रेवाच ने दी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच एजेंडे में आयरन डोम को लेकर बातचीत भी शामिल है। उन्होंने कहा कि इजराइल इस टेक्नोलॉजी को भारत के साथ शेयर करने के लिए है। रेवाच ने कहा कि दोनों देशों के बीच पहले से मजबूत रक्षा संबंध है। अब इसे आगे बढ़ाते हुए भारत में सैन्य उपकरणों के निर्माण पर फोकस किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी रक्षा सहयोग को इस यात्रा का अहम एजेंडा बताया है। भारत-इजराइल में FTA पर बातचीत जारी मोदी का यह दौरा ऐसे वक्त पर हो रहा है जब भारत और इजराइल के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत का पहला दौर 23 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में शुरू हुआ है और यह 26 फरवरी 2026 तक चलेगा। नवंबर 2025 में दोनों देशों ने टर्म्स ऑफ रेफरेंस पर साइन किए थे, जिससे यह तय हुआ कि किन मुद्दों पर बातचीत होगी और कैसे आगे बढ़ा जाएगा। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल सामान का व्यापार 3.62 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। दोनों देश कई क्षेत्रों में एक-दूसरे के लिए फायदेमंद हैं। यह एफटीए दोनों के बीच व्यापार बढ़ाने में मदद करेगा और कारोबारियों, खासकर छोटे और मध्यम उद्योगों को ज्यादा भरोसा और स्थिरता देगा। इस बातचीत के दौरान दोनों देशों के एक्सपर्ट्स अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। इनमें गुड्स एंड सर्विसेज का व्यापार, रूल्स ऑफ ओरिजन, हेल्थ और पौधों से जुड़े नियम, व्यापार में आने वाली तकनीकी रुकावटें, कस्टम प्रोसेस, व्यापार को आसान बनाने के उपाय और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स जैसे मुद्दे शामिल हैं। मोदी के इजराइल दौरे की टाइमिंग पर सवाल उठे मोदी के इजराइल दौरे की टाइमिंग को लेकर विदेश मामलों की स्थायी संसदीय समिति ने सवाल उठाए हैं। यह दौरा ऐसे वक्त हो रहा है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है। अमेरिका की सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं। सोमवार को समिति की बैठक में कुछ सांसदों ने सवाल उठाया कि जब भारत ने अपने नागरिकों को संभावित अमेरिकी हमले के खतरे के कारण ईरान छोड़ने की सलाह दी है, तो ऐसे समय में प्रधानमंत्री का इजराइल जाना कितना उचित है। इस पर विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि सभी प्रधानमंत्री स्तर की यात्राएं सुरक्षा को ध्यान में रखकर तय की जाती हैं, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि तनाव बढ़ने पर दौरा रद्द होगा या नहीं। बैठक की अध्यक्षता समिति अध्यक्ष शशि थरूर ने की थी।कुछ सांसदों ने आरोप लगाया कि सरकार विदेश नीति में अमेरिका के प्रभाव को ज्यादा महत्व दे रही है और इससे भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। मोदी इजराइल जाने वाले एकमात्र भारतीय PM मोदी इजराइल का दौरा करने वाले अब तक एकमात्र भारतीय प्रधानमंत्री हैं। 70 साल तक किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने इजराइल की यात्रा नहीं की थी। 2017 में मोदी ने यह ऐतिहासिक कदम उठाया और दोनों देशों के रिश्तों में नई शुरुआत की। भारत ने 1950 में इजराइल को मान्यता दी, 1992 में कूटनीतिक संबंध स्थापित किए, लेकिन प्रधानमंत्री स्तर की यात्रा नहीं हुई। इसकी एक बड़ी वजह भारत की पारंपरिक फिलिस्तीन-समर्थक नीति रही। जुलाई 2017 में मोदी की पहली यात्रा को ‘पाथ-ब्रेकिंग’ कहा गया। उस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन और टेक्नोलॉजी से जुड़े सेक्टर्स में समझौते हुए। कभी इजराइल बनने के खिलाफ था भारत भारत और इजराइल के संबंधों में भले ही आज गर्मजोशी देखी जाती है, लेकिन शुरुआत में भारत इजराइल बनने के ही खिलाफ था। भारत नहीं चाहता था कि फिलिस्तीन को बांटकर इजराइल बनाया जाए। महात्मा गांधी ने 1938 में अपने साप्ताहिक पत्र हरिजन में लिखा कि फिलिस्तीन उतना ही अरबों का है जितना इंग्लैंड अंग्रेजों का और फ्रांस फ्रांसीसियों का। उन्होंने यहूदियों के साथ हो रहे जर्मन अत्याचारों पर सहानुभूति जताई, लेकिन साथ ही कहा कि किसी पीड़ित समुदाय की समस्या का समाधान दूसरे समुदाय की जमीन पर उन्हें बसाकर नहीं किया जा सकता। 1947 में जब संयुक्त राष्ट्र ने फिलिस्तीन को दो हिस्सों यहूदी राज्य (इजराइल) और अरब राज्य (फिलिस्तीन) में बांटने का प्रस्ताव रखा, तब भारत ने इसका विरोध किया। भारत का मानना था कि यह विभाजन बाहरी दबाव में किया जा रहा है और इससे स्थायी शांति नहीं आएगी। स्वतंत्रता के बाद भी भारत अपने रुख पर कायम रहा। 1949 में जब इजराइल की संयुक्त राष्ट्र सदस्यता पर मतदान हुआ, तो भारत ने उसके खिलाफ वोट दिया। इस दौर की नीति ने भारत की विदेश नीति की नींव रखी। यही कारण है कि शुरुआती दशकों में भारत ने खुद को फिलिस्तीनी अधिकारों का समर्थक और पश्चिम एशिया की राजनीति में संतुलन बनाने वाले देश के रूप में स्थापित किया।
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