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    कानपुर का 'धुरंधर' सिंगर:इंडियल आइडल-14 के विजेता वैभव ने गाना गाया, पिता बोले- बेटे ने सरप्राइज दिया

    4 days ago

    कानपुर के वैभव गुप्ता इन दिनों अपने सॉन्ग ‘मन अटकैया’ को लेकर चर्चा में हैं। वैभव गुप्ता ने यह सॉन्ग फिल्म 'धुरंधर द रिवेंज' में गाया है। अब यह तेजी से लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहा है। खास बात यह रही कि वैभव ने इस गाने के बारे में अपने परिवार और पिता को पहले से कोई जानकारी नहीं दी थी। जब सॉन्ग रिलीज हुआ, तब परिवार को पता चला कि उनके बेटे ने इसे अपनी आवाज दी है। वैभव के पिता विष्णु गुप्ता ने बताया- बेटा अक्सर कहता था- पापा, जल्द ही आपको बड़ा सरप्राइज दूंगा। जब यह सच हुआ, तो परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। दैनिक भास्कर से बातचीत में वैभव ने कहा- यह मेरे करियर की शुरुआत है। आगे भी हम कई सरप्राइज देने वाले हैं। आने वाले समय में कई बॉलीवुड फिल्मों में आवाज सुनने को मिलेगी पढ़िए पूरी रिपोर्ट….. वैभव का सपना था कि रणवीर के लिए प्लेबैक सिंगिंग करें कल्याणपुर के नानकारी इलाके में रहने वाले वैभव इंडियन आइडल सीजन-14 जीतने के बाद से लगातार सिंगिंग कर रहे हैं। लेकिन बॉलीवुड में उनकी खास पहचान ‘धुरंधर द रिवेंज’ के इस सॉन्ग से बनी है। वैभव ने बताया- मेरी इच्छा सलमान खान, विक्की कौशल और रणवीर सिंह के लिए प्लेबैक सिंगिंग करने की रही है। इंडियन आइडल जीतने के बाद मुझे लगा कि अब मेरा सपना जरूर पूरा होगा। फिर पहली बार रितिक रोशन की फिल्म फाइटर में विशाल के साथ गाने का मौका मिला। इसके बाद लगातर स्ट्रगल करता रहा। अब जाकर धुरंधर द रिवेंज फिल्म के डायरेक्टर आदित्य धर ने मुझे मौका दिया और मैंने रणवीर सिंह के लिए गाना गाया। वैभव का बालीवुड में पहला सोलो सांग वैभव के पिता विष्णु गुप्ता ने बताया- पूरा परिवार बहुत खुश है। यह सब ईश्वर की कृपा है कि वैभव को इतना बड़ा मौका मिला। वैभव ने बताया है कि फिल्म के निर्देशक आदित्य धर बहुत अच्छे इंसान हैं। जब उन्होंने वैभव की आवाज सुनी तो कहा कि यह गाना वैभव ही गाएंगे। यह वैभव का पहला सोलो गाना है। पढ़िए गीत के बारे में.. ‘मन अटकैया’ गीत सूफी अंदाज में तैयार किया गया है, जो सूफी कवि शाह हुसैन की ‘काफी’ से जुड़ी हैं। इसे सबसे पहले महान गायक नुसरत फतेह अली खान ने गाया था। अब इस क्लासिक रचना को रीक्रिएट कर फिल्म में नए अंदाज में पेश किया गया है। वैभव गुप्ता ने बताया- इस गाने को मैंने शहजाद अली, टोकन और शाश्वत सचदेव के साथ मिलकर गाया है। सूफी और क्लासिकल रंग के इस गीत को गाना मेरे करियर का खास अनुभव रहा है। अब जानिए वैभव गुप्ता के बारे में… नानकारी इलाके के रहने वाले वैभव गुप्ता को बचपन से ही गाने का बड़ा शौक था। पिता ने बताया- जब वैभव तीन साल का था, तभी मां का निधन हो गया। बड़े पापा मुन्ना लाल गुप्ता, बड़ी मम्मी प्रीति गुप्ता के साथ ही वैभव रहे।। वैभव ने कल्याणपुर के मंटोर स्कूल से इंटर की परीक्षा 2023 में पास की थी। वैभव की जॉइंट फैमिली में चाचा और ताऊ का पूरा परिवार रहता है। वैभव अक्सर घर में गाना गाया करता था। एक दिन पिता ने बैठाकर पहले खुद गाना सुना, उसी दिन पिता ने सोचा कि वैभव को इस क्षेत्र में आगे जाना चाहिए। सिविल लाइंस स्थित रागेंद्र स्वरूप ऑडिटोरियम हॉल में सिंगिग प्रतियोगिता हुई। इसमें वैभव ने पहला स्थान प्राप्त किया। उस समय वैभव की उम्र सात साल की थी। इसके बाद से वैभव का सफर शुरू हो गया। इसके बाद वैभव अपने स्कूल टीचर आनंद सर से गाना सीखने लगा। वैभव एक प्रतियोगिता में गया था, वहां पर सिंगर शशांक निर्णायक की भूमिका में आए थे। यहां पर उन्होंने वैभव को देखा। इसके बाद शशांक ने खुद वैभव को सिखाने के लिए फैसला लिया। इसके बाद से वैभव अपने गुरु शशांक से सिंगिग के टिप्स लेने लगा। स्कूल में वैभव फुटबॉल खेलता स्कूल में वैभव फुटबॉल खेलता था, लेकिन खेल में सांस फूलती थी। गले की आवाज बदल जाती थी। इस कारण ऐसे में वैभव ने फुटबाल खेलना छोड़ दिया। पूरा समय फिर वह अपने गाने में ही देने लगा। शहर में निकलने वाली सबसे बड़ी यात्रा जगन्नाथ यात्रा में अक्सर वैभव अपने गुरु शशांक सर के साथ भजन गाने के लिए जाया करता था। वहां पर वैभव के भजन को लोग काफी पसंद करते थे। फिल्मी गीतों के साथ-साथ भजन गाने का भी बहुत शौक रखता था। बचपन से वैभव सुखविंदर के काफी गाना गाया करता था। वैभव सिंगर सुखविंदर को अपना आइडल मानता है। इसलिए उसको दोस्त यार सभी लोग लिटिल सुखविंदर कह कर बुलाते है। रिश्तेदार और पड़ोसी भी उसे लिटिल सुखविंदर ही कहते हैं।
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