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    इजराइल-ईरान युद्ध का असर, हिमाचल में खाद का संकट:यूरिया की भारी किल्लत, खाली हाथ लौट रहे किसान-बागवान, 3700 मीट्रिक टन की डिमांड, मिली 800MT

    12 hours ago

    इजराइल-ईरान युद्ध का असर अब हिमाचल प्रदेश के खेतों और बागीचों तक पहुंचने लगा है। राज्य के किसान-बागवानों को इन दिनों विभिन्न खाद नहीं मिल पा रही हैं। इससे सेब बागवानों के साथ-साथ गेहूं, फूलगोभी, मटर जैसी नकदी फसलें उगा रहे किसान परेशान हैं। प्रदेश में यूरिया, 12-32-16 (तीन पोषक तत्व- नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश) और MOP (म्यूरेट ऑफ पोटाश) जैसी जरूरी खादों का संकट खड़ा हो गया है। इन खादों के लिए किसान दर-दर भटक रहे हैं और रोजाना सरकारी उपक्रम एवं खाद वितरण करने वाले हिमफेड के गोदामों के चक्कर काट रहे हैं, मगर उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी विपणन एवं उपभोक्ता संघ लिमिटेड (हिमफेड) को केंद्र सरकार से पर्याप्त सप्लाई नहीं मिल रही है, जबकि उसने कई दिन पहले ही लगभग 3700 मीट्रिक टन यूरिया और 1400 मीट्रिक टन 12-32-16 खाद की मांग भेज रखी है। राज्य को यूरिया मात्र 800 मीट्रिक टन और 12-32-16 केवल 240 मीट्रिक टन ही मिल पाई है। यह ऊंट के मुंह में जीरे समान है। हिमफेड का दावा है कि MOP खाद तीन-चार दिन में आ जाएगी और किसानों-बागवानों को उपलब्ध करवा दी जाएगी। खाड़ी देशों में तनाव से टूटी सप्लाई चेन जानकारों के अनुसार, खाद उत्पादन के लिए जरूरी कच्चा माल और गैस बड़े पैमाने पर खाड़ी देशों से आता है। वर्तमान में खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और संभावित संघर्ष की स्थिति ने सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। इसका सीधा असर आयात पर पड़ रहा है। खासकर यूरिया उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली गैस और फॉस्फेट-पोटाश जैसे कच्चे माल की उपलब्धता प्रभावित होने से खाद की कमी बढ़ गई है। खेती-बागवानी पर सीधा असर प्रदेश में इन खादों की सबसे ज्यादा जरूरत सेब के लिए रहती है। सेब के अलावा गेहूं, आलू, मटर और फूलगोभी जैसी फसलों में भी इन दिनों यूरिया, 12-32-16 और MOP डाली जाती है। खाद नहीं मिलने से किसानों को फसलों में पोषक तत्वों की कमी की चिंता सता रही है। इससे उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। खाद न मिलने से किसान परेशान: बिष्ट प्रोग्रेसिव ग्रोअर एसोसिएशन (PGA) के अध्यक्ष लोकेंद्र बिष्ट ने बताया कि इन दिनों सभी खादों के लिए मारामारी है और खाद डालने का यही उपयुक्त समय है। विशेषकर हाल ही में अच्छी बारिश हुई है, ऐसे में जितना जल्दी संभव हो बगीचों में खाद डालनी चाहिए, मगर किसानों को खाद नहीं मिल रही है। क्या कहते हैं हिमफेड चेयरमैन हिमफेड के चेयरमैन महेश्वर चौहान के अनुसार, खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध जैसे हालात के कारण खाद की सप्लाई प्रभावित हुई है। उन्होंने बताया कि यदि यह स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो आने वाले दिनों में खाद की किल्लत और बढ़ सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि खाद का आवंटन केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है और राज्य को उसी के अनुसार आपूर्ति मिलती है। हिमफेड ने खादों की मांग भेज रखी है और उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं। उन्होंने बताया कि मंगलवार को यूरिया की चार गाड़ियां सावड़ा, गुमा, बड़ियारा और ठियोग के लिए भेजी गई हैं, जबकि MOP खाद तीन-चार दिन में आने की संभावना है।
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