Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    इंडियन बास्केट क्रूड $146 पर पहुंचा, गैस की किल्लत बढ़ी:ईरान के हमले के बाद कतर का गैस प्लांट बंद; यूरोप में कीमतें 30% तक उछली

    8 hours ago

    ईरान की ओर से खाड़ी देशों के एनर्जी ठिकानों पर नए हमलों के बाद आज 19 मार्च को ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल और नेचुरल गैस की कीमतों में 30% तक की तेजी है। इस संकट से भारत में गैस सिलंडर और पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं। ईरान ने कतर के मुख्य LNG प्लांट को निशाना बनाया है जिससे सप्लाई रुकने की आशंका बढ़ गई है। 1. क्रूड की कीमतें 6% बढ़कर 114 डॉलर प्रति बैरल के पार निकली जंग से पहले ब्रेंट क्रूड 73 डॉलर के नीचे था। अब इसकी कीमत उछलकर 114 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है। वहीं इंडियन बास्केट की कीमतें 146 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। तीन बड़े बेंचमार्क के आधार पर पहचाना जाता है कच्चा तेल दुनिया भर में कच्चा तेल मुख्य रूप से तीन बड़े बेंचमार्क के आधार पर पहचाना और बेचा जाता है, जिन्हें ब्रेंट, WTI और OPEC बास्केट कहते हैं। ब्रेंट क्रूड उत्तरी सागर (यूरोप) के समुद्री कुओं से निकलता है और दुनिया का दो-तिहाई तेल कारोबार इसी के भाव पर टिका है। वहीं WTI अमेरिका के जमीनी इलाकों से निकलता है और अपनी शुद्धता के कारण अमेरिकी बाजार का मुख्य मानक है। OPEC बास्केट सऊदी अरब, ईरान और इराक जैसे खाड़ी देशों के संगठन (OPEC) द्वारा उत्पादित अलग-अलग कच्चे तेलों का एक औसत मिश्रण है। इंडियन बास्केट क्या है? भारत किसी एक देश या एक ही तरह का तेल नहीं खरीदता, बल्कि कई देशों जैसे इराक, सऊदी अरब, रूस, UAE से अलग-अलग वैरायटी का तेल खरीदता हैं। इन सभी अलग-अलग तरह के तेलों की कीमतों का जो औसत निकाला जाता है, उसे ही 'इंडियन बास्केट' कहते हैं। 2. यूरोप में गैस की कीमतें 30% से ज्यादा उछली ईरान के कतर पर किए गए इस हमले का सबसे ज्यादा असर यूरोप में गैस के दामों पर पड़ा है। यहां मुख्य गैस कॉन्ट्रैक्ट डच TTF बेंचमार्क एक समय करीब 30% तक उछलकर 70 यूरो पर पहुंच गया था। हालांकि अभी यह 16% की तेजी के साथ 63 यूरो के करीब ट्रेड कर रहा है। ब्रिटेन में गैस की कीमतें 140% तक बढ़ीं ब्रिटेन में थोक गैस की कीमतें बढ़कर 171.34 पेंस प्रति थर्म ($2.29) पर पहुंच गई हैं। जनवरी 2023 के बाद से कीमतें इस स्तर तक पहले कभी नहीं पहुंची थीं। जंग शुरू होने के बाद ये करीब 140% बढ़ी है। युद्ध से पहले इसकी कीमत 71.13 पेंस प्रति थर्म ($1.33) थी। भारत पर होने वाले असर को 2 पॉइंट में समझें… भारत अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल और 50% से ज्यादा गैस आयात करता है, इसलिए वहां की हर हलचल हमारी जेब और इकोनॉमी पर असर डालती है। 1. पेट्रोल-डीजल और LPG के दाम बढ़ सकते हैं भारतीय बास्केट की कीमत 146 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। अगर कच्चा तेल इसी स्तर पर बना रहा, तो सरकारी तेल कंपनियों के लिए मौजूदा कीमतों पर पेट्रोल-डीजल बेचना मुश्किल होगा। आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 10 से 15 रुपए तक की बढ़ोतरी की आशंका बन सकती है। साथ ही, गैस की किल्लत से LPG सिलेंडर के दाम भी बढ़ सकते हैं। हाल ही में ऑयल रिफाइनिंग कंपनियों ने घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में 60 रुपए का इजाफा किया था। 2. खाने-पीने की चीजें भी महंगी हो सकती है कच्चा तेल सिर्फ गाड़ियों के ईंधन के काम नहीं आता, बल्कि पेंट, प्लास्टिक, फर्टिलाइजर और दवाइयों के कच्चे माल में भी इस्तेमाल होता है। डीजल महंगा होने से माल ढुलाई महंगी होगी, जिससे फल, सब्जी और अनाज के दाम बढ़ेंगे। कुल मिलाकर आम आदमी का बजट बिगड़ जाएगा। क्रूड और गैस के दाम बढ़ने की 2 वजहें 1. कतर का रास लफ्फान प्लांट बंद ईरान के ड्रोन हमलों में कतर के रास लफ्फान को काफी नुकसान पहुंचा है। यह दुनिया का सबसे बड़ा LNG हब है और ग्लोबल सप्लाई का करीब पांचवां हिस्सा (20%) यहीं से आता है। हमले के बाद इस प्लांट को फिलहाल बंद कर दिया गया है। इससे सप्लाई रुक गई है। 2. 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' का लगभग बंद होना भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' का बंद होना है। ये करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान जंग के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं रहा है। खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। ईरान खुद इसी रूट से एक्सपोर्ट करता है।
    Click here to Read More
    Previous Article
    Gulf crisis: Govt classifies energy data as national security matter
    Next Article
    New Year 2026: सुदर्शन पटनायक ने नव वर्ष की शुभकामनाएं दीं | Hindi News

    Related व्यापार Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment