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    हरियाणा बाल आयोग ने सिंगर बादशाह को तलब किया:सिंगर- निर्देशकों को नोटिस भेजा, 'टटीरी' सॉन्ग को लेकर विवाद

    10 hours ago

    बॉलीवुड रेपर एवं सिंगर बादशाह (आदित्य प्रतीक सिंह सिसोदिया) की मुश्किलें अब लगातार बढ़ती जा रही है। हरियाणा राज्य महिला आयोग के बाद अब हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (HSCPCR) ने भी शिकंजा कस दिया है। बाल आयोग ने हाल ही में रिलीज हुए म्यूजिक वीडियो ‘टटीरी’ में स्कूली बच्चों के चित्रण और शिक्षा के प्रति उनके व्यवहार को गलत तरीके से पेश करने के आरोप में बादशाह को नोटिस जारी किया है। साथ ही वीडियो के निर्देशकों को भी नोटिस भेजकर तलब किया है। आयोग ने इस वीडियो के दृश्यों को बच्चों के मनोविज्ञान और सामाजिक मूल्यों के खिलाफ माना है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह नोटिस ईमेल और आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल के माध्यम से भेजा गया है, जिसे 'सफिशिएंट सर्विस' (पर्याप्त तामील) माना जाएगा। ये है पूरा मामला गायक बादशाह का नया गाना 'टटीरी' सोशल मीडिया पर चर्चा में है, लेकिन इसकी सामग्री को लेकर बाल अधिकार आयोग को कई शिकायतें प्राप्त हुई थीं। शिकायतों के आधार पर आयोग ने खुद संज्ञान लेते हुए कार्रवाई शुरू की है। आयोग के अनुसार, वीडियो में कुछ ऐसे दृश्य फिल्माए गए हैं जो छात्रों के बीच अनुशासनहीनता को बढ़ावा देते प्रतीत होते हैं। आयोग की मुख्य आपत्तियां इन लोगों को भेजा गया है नोटिस आयोग ने सीपीआरसी अधिनियम 2005 की धारा 13 (1)(c) और (i) के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए निम्नलिखित को नोटिस सर्व किया है। आदित्य प्रतीक सिंह सिसोदिया (बादशाह)- टीएम वेंचर्स के माध्यम से। माही संधू और जोबन संधू- टटीरी म्यूजिक वीडियो के निर्देशक। बटुगेदरप्रोस- प्रोडक्शन हाउस। और आलाप गोशर- सीईओ और सह-संस्थापक, टीएम वेंचर्स। आयोग का तर्क और कानूनी आधार आयोग के सचिव और सलाहकार (बाल संरक्षण) के माध्यम से जारी इस नोटिस में कहा गया है कि मनोरंजन के नाम पर बच्चों के भविष्य और उनके आचरण के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। आयोग का मानना है कि बादशाह जैसे बड़े कलाकार के करोड़ों फॉलोअर्स हैं, जिनमें बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे शामिल हैं। ऐसे में इस तरह का चित्रण छात्रों को पढ़ाई छोड़ने या स्कूल में गलत व्यवहार करने के लिए प्रेरित कर सकता है। 7 दिन में मांगा जवाब नोटिस में निर्देशक माही संधू और जोबन संधू को भी कटघरे में खड़ा किया गया है। आयोग का कहना है कि वीडियो के रचनात्मक निर्देशन की जिम्मेदारी उनकी थी, इसलिए उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि वीडियो की सामग्री बाल अधिकारों या उनके नैतिक विकास का उल्लंघन न करे। आयोग ने सभी संबंधित पक्षों को अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए 7 दिन का समय दिया है। आगामी कार्रवाई और जवाबदेही आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित 7 दिनों की समय सीमा के भीतर आयोग को संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो आगे की कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। इसमें वीडियो के विवादास्पद हिस्सों पर प्रतिबंध लगाने, वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटवाने या कानूनी दंड के निर्देश शामिल हो सकते हैं। यह मामला मनोरंजन उद्योग के लिए एक बड़ी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है कि वे बच्चों से जुड़ी सामग्री या पात्रों का उपयोग करते समय अत्यधिक सावधानी बरतें। हरियाणा बाल अधिकार आयोग ने यह साफ कर दिया है कि वे राज्य में बच्चों के हितों और उनकी गरिमा की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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