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    हार्वर्ड प्रोफेसर बोलीं-भारत को टैरिफ से ज्यादा प्रदूषण से खतरा:गीता गोपीनाथ ने कहा- हर साल 17 लाख लोग मर रहे, फिर भी ध्यान नहीं

    1 week ago

    हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर गीता गोपीनाथ ने पॉल्यूशन को भारत के लिए टैरिफ से ज्यादा बड़ा खतरा बताया है। उन्होंने ये बयान बुधवार को दावोस में भारतीय मीडिया से बात करते हुए दिया। गीता यहां वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की मीटिंग में शामिल होने पहुंची थीं। उन्होंने कहा कि जब नए कारोबार और आर्थिक विकास की बात होती है, तो चर्चा ज्यादातर व्यापार, टैरिफ और नियमों तक सीमित रहती है, जबकि प्रदूषण को उतनी अहमियत नहीं दी जाती। उन्होंने कहा कि भारत में प्रदूषण एक बड़ी चुनौती है और इसका असर अब तक लगाए गए किसी भी टैरिफ से कहीं ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाला है। उन्होंने कहा कि वर्ल्ड बैंक की 2022 की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर साल करीब 17 लाख लोगों की मौत प्रदूषण के कारण होती है। यह देश में होने वाली कुल मौतों का लगभग 18% है। प्रदूषण से देश के विकास को लंबे वक्त का नुकसान गीता गोपीनाथ ने बताया कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौत से परिवारों पर असर पड़ता है, कामकाजी लोगों की संख्या घटती है और देश के लंबे समय के विकास को नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण की वजह से लोगों की काम करने की क्षमता घटती है, इलाज पर खर्च बढ़ता है और देश की आर्थिक गतिविधियों पर बुरा असर पड़ता है। इससे विकास की रफ्तार धीमी होती है। गीता गोपीनाथ ने कहा कि प्रदूषण सिर्फ भारत की अंदरूनी समस्या नहीं है, बल्कि यह उन विदेशी निवेशकों के लिए भी चिंता का विषय है जो भारत में इन्वेस्ट करने के बारे में सोच रहे हैं। विदेशी इन्वेस्टर निवेश करने से पहले पर्यावरण भी ध्यान में रखते हैं गीता गोपीनाथ ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय निवेशक जब भारत में कारोबार शुरू करने और यहां रहने की योजना बनाते हैं, तो वे पर्यावरण को भी ध्यान में रखते हैं। खराब हवा और खराब रहने की स्थिति, खासकर स्वास्थ्य से जुड़े खतरे, निवेशकों को रोक सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह चिंता उन भारतीयों के लिए और भी ज्यादा है जो रोज प्रदूषित शहरों में रहते और काम करते हैं। प्रदूषण पर कंट्रोल और नियमों में ढील जैसे मुद्दों पर तुरंत पॉलिसी लेवल पर कदम उठाने की जरूरत है। भारत जब खुद को एक ग्लोबल आर्थिक और मैन्युफैक्चरिंग सेंटर के तौर पर पेश कर रहा है, तब ये बातें साफ करती हैं कि साफ शहर और बेहतर जीवन स्थितियां बहुत जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि प्रदूषण से निपटना सिर्फ पर्यावरण से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि यह लोगों की जान बचाने, आर्थिक विकास बढ़ाने और भारत को विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक बनाने से जुड़ा है। लैंसेट रिपोर्ट में दावा- भारत में प्रदुषण जानलेवा खतरा बना भारत में वायु प्रदूषण अब सिर्फ एक पर्यावरण की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह लोगों की जान और देश की अर्थव्यवस्था दोनों के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट लैंसेट काउंटडाउन ऑन हेल्थ एंड क्लाइमेट चेंज ने 29 अक्टूबर 2025 को जारी रिपोर्ट में इसकी पुष्टि की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2022 में भारत में PM 2.5 नामक बारीक प्रदूषक कणों के कारण 17 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुईं। ये 2010 के मुकाबले 38% ज्यादा हैं। इनमें से करीब 44% मौतें कोयला और पेट्रोलियम जैसे जीवाश्म ईंधनों (फॉसिल फ्यूल) के जलने से हुईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि सिर्फ कोयले के कारण करीब 3 लाख 94 हजार लोगों की मौत हुई, जिनमें से ज्यादातर मौतें थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाले प्रदूषण की वजह से हुईं। इसके अलावा सड़कों पर चलने वाले वाहनों में इस्तेमाल होने वाले पेट्रोल से भी बड़ी संख्या में मौतें जुड़ी हैं। 2022 में बाहरी वायु प्रदूषण से ₹30 लाख करोड़ का नुकसान लैंसेट की यह रिपोर्ट 71 शैक्षणिक संस्थानों और UN एजेंसियों से जुड़े 128 एक्सपर्ट्स ने मिलकर तैयार की है। रिपोर्ट की प्रमुख लेखिका मारियाना रोमानेलो ने कहा कि भारत के लिए एक अलग रिपोर्ट तैयार की गई है, क्योंकि देश जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण से बहुत ज्यादा प्रभावित है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि 2022 में बाहर की हवा (PM2.5, धुआं, गाड़ियों का प्रदूषण, फैक्ट्रियां) के प्रदूषण से होने वाली समय से पहले मौतों का आर्थिक नुकसान करीब 339 अरब डॉलर (करीब 30 लाख करोड़ रुपए) रहा। यह भारत की कुल अर्थव्यवस्था का करीब 9.5% है। घर के अंदर होने वाला प्रदूषण भी एक बड़ी समस्या बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, लकड़ी, कोयला और अन्य गंदे ईंधन से होने वाले घरेलू प्रदूषण के कारण ग्रामीण इलाकों में ज्यादा मौतें हुई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति एक लाख लोगों पर 125 मौतें दर्ज की गईं, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 99 रहा। 2024 में लोगों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि 2024 में भारत के लोगों को औसतन करीब 20 दिन भीषण गर्मी का सामना करना पड़ा। इनमें से लगभग एक-तिहाई दिन ऐसे थे, जो जलवायु परिवर्तन के बिना नहीं होते। रिपोर्ट के मुताबिक, बहुत गर्मी के कारण लोगों को पहले के मुकाबले ज्यादा समय तक खतरनाक तापमान में काम करना पड़ा। इसका असर देश की कामकाजी क्षमता पर पड़ा और 2024 में करीब 247 अरब घंटे के कामकाजी नुकसान हुआ। इसका सबसे ज्यादा असर खेती और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर पड़ा। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अत्यधिक गर्मी के कारण काम करने की क्षमता घटने से 2024 में करीब 373 मिलियन डॉलर की संभावित आय का नुकसान हुआ। दस साल में भारत में डेंगू के मामले दोगुने हुए हेल्थ से जुड़ी दूसरी चिंताओं का जिक्र करते हुए रिपोर्ट में कहा गया था कि पिछले दस सालों में भारत में डेंगू के मामलों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। इसके अलावा, देश में करीब 1 करोड़ 80 लाख लोग समुद्र तल से एक मीटर से भी कम ऊंचाई पर रहते हैं, जिन्हें समुद्र स्तर बढ़ने से खतरा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2001 से 2023 के बीच भारत में 23 लाख हेक्टेयर से ज्यादा पेड़ों का आवरण खत्म हो गया, जिसमें से बड़ी संख्या सिर्फ 2023 में ही खत्म हुई। शहरों में हरियाली भी लगातार कम हो रही है। देश के बड़े शहरों में शहरी हरियाली की स्थिति बेहद खराब है। 5 लाख से ज्यादा आबादी वाले 189 शहरों में से ज्यादातर शहरों में हरियाली बहुत कम है। पश्चिम बंगाल का तामलुक एकमात्र ऐसा शहर है, जहां शहरी हरियाली अच्छी पाई गई। एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि वायु प्रदूषण से जुड़ी मौतों का संबंध दिल की बीमारी, फेफड़ों के कैंसर, डायबिटीज और डिमेंशिया जैसी बीमारियों से है। यह स्थिति भारत की बढ़ती उम्र वाली आबादी के लिए खास तौर पर चिंता का विषय है और इससे निपटने के लिए साफ हवा और स्वास्थ्य नीतियों को विकास योजनाओं से जोड़ने की जरूरत है। केंद्र ने माना था- 40% प्रदूषण ट्रांसपोर्ट सेक्टर से फैल रहा केंद्र सरकार ने पिछले साल दिसंबर में माना था कि दिल्ली में होने वाले प्रदूषण का करीब 40% हिस्सा गाड़ियों से आता है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि इसकी बड़ी वजह पेट्रोल और डीजल पर चलने वाली गाड़ियां हैं। उन्होंने कहा कि अब ऐसे ईंधन अपनाने की जरूरत है जो कम गंदगी फैलाएं। वहीं, संसद में सरकार ने कहा था कि अभी ऐसा कोई पक्का सबूत नहीं है जिससे यह साफ साबित हो सके कि प्रदूषण सीधे तौर पर फेफड़ों की बीमारियों की वजह बनता है। लेकिन सरकार ने यह जरूर माना कि गंदी हवा सांस से जुड़ी बीमारियों को बढ़ा सकती है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन सालों में दिल्ली में सांस की बीमारियों के दो लाख से ज्यादा मामले सामने आए हैं। इनमें से करीब 30 हजार लोगों को ज्यादा बीमार होने की वजह से अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। टॉप-50 प्रदूषित शहरों में 47 भारत के दुनियाभर के सबसे प्रदूषित 50 शहरों की लाइव लिस्ट में पिछले महीने भारत के 47 शहर शामिल थे। दिल्ली-NCR के कमोबेश सभी इलाकों का AQI 400 पार था। ये खतरनाक कैटेगरी में आता है यानी खतरे का आखिरी पायदान। उस वक्त दिल्ली में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने भारत को प्रदूषण कम करने में मदद करने की पेशकश की थी। उन्होंने बताया था कि कुछ साल पहले चीन की राजधानी बीजिंग भी दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल था, लेकिन अब वहां का AQI ज्यादातर 100 से नीचे रहता है। यू जिंग ने सोशल मीडिया पर दो तस्वीरें शेयर कीं थीं। इनमें से एक में चीन का AQI 68 और दूसरी में भारत का AQI 447 दिखाया गया था। जिंग ने लिखा था, ये फर्क चीन के पिछले एक दशक के लगातार प्रयासों का नतीजा है। आने वाले दिनों में हम एक सीरीज में स्टेप-बाय-स्टेप बताएंगे कि चीन ने प्रदूषण पर कैसे कंट्रोल किया। जिंग ने प्रदूषण कम करने के 3 स्टेप बताए थे... स्टेप 1: गाड़ियों का प्रदूषण कम करना स्टेप 2: इंडस्ट्रियल प्रदूषण कम करना स्टेप 3: कोयले का इस्तेमाल कम करना कोयले के बजाय बिजली और गैस का इस्तेमाल शुरू किया जाए। कोयले से चलने वाले पावर प्लांट को नेचुरल गैस से चलाया जाए बंद किए जाए। अभी दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए क्या किया जा रहा? दिल्ली सरकार ने ग्रेडेड रेस्पॉन्स एक्शन प्लान यानी GRAP की स्टेज IV लागू की है। इसके तहत... ------------------ यह खबर भी पढ़ें... यूरोपीय यूनियन ने भारत से रक्षा समझौते को मंजूरी दी:अगले हफ्ते दिल्ली में डील होगी; EU बोला- आतंकवाद के खिलाफ लड़ने में मदद मिलेगी यूरोपीय यूनियन (EU) ने भारत के साथ नए रक्षा समझौते (सिक्योरिटी और डिफेंस एग्रीमेंट) को मंजूरी दे दी है। अगले हफ्ते नई दिल्ली में होने वाले भारत-EU शिखर सम्मेलन में इस पर साइन होंगे। पढ़ें पूरी खबर...
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