Search

    Language Settings
    Select Website Language

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policy, and Terms of Service.

    Exclusive: अवैध बांग्लादेशियों को ‘नेटवर्क’ कैसे दिला रहा आधार, डोमिसाइल और वोटर-आईडी

    3 days ago

    स्थानीय एजेंट्स की पहुंच बड़े राजनीतिक चेहरों तक होने का दावा; बिना जांच सिफारिशी चिट्ठियां, लापरवाह अधिकारियों की भूमिका और पांच हजार में ‘कागज़’—मुंबई में फर्जी पहचान पर NDTV इंडिया की पड़ताल, एक बांग्लादेशी नागरिक का ऑन-कैमरा स्वीकारोक्ति NDTV इंडिया की टीम के हाथ ऐसी जानकारी और बयान आए हैं. जो देश में फर्जी दस्तावेज़ों के जरिए अवैध घुसपैठियों को भारतीय पहचान दिलवाने के संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं. एजेंट्स के दावों के मुताबिक, आधार से लेकर डोमिसाइल, बर्थ सर्टिफिकेट और वोटर-आईडी तक- सब कुछ कुछ ही हज़ार रुपए में बनवा दिया जाता है. इस नेटवर्क में स्थानीय नेताओं, सिफारिशी पत्रों और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठते हैं. NDTV इंडिया ने मुंबई में फर्जी पहचान के साथ रह रहे एक बांग्लादेशी नागरिक को भी खोज निकाला, जिसने अपनी यात्रा, पहचान बनाने की प्रक्रिया और वोट डालने तक का अनुभव साझा किया. एजेंट्स का दावा: ‘बिना जांच सिफारिश से बनते हैं फर्जी कागज एजेंट्स की पहुंच बड़े राजनीतिक चेहरों तक होने का दावा. स्थानीय नेता बिना जांच सिफारिशी चिट्ठियाँ आगे बढ़ाते हैं. दस्तावेज़ बनाने वाले अधिकारियों की लापरवाही बांग्लादेशियों के पक्ष में जा रही है. चुनावों के दौरान एजेंट्स स्थानीय नेताओं की मदद करते हैं. नेटवर्क का फैलाव: एक इलाके में 20–25 एजेंट्स सक्रिय—क्योंकि इसमें मोटी कमाई है. ‘आसान’ तरीके: डोमिसाइल, बर्थ सर्टिफिकेट, आधार—सब कुछ संभव? एजेंट्स के अनुसार- डोमिसाइल सर्टिफिकेट बनवाना “आसान”—इसके लिए 15 साल पुराने बैंक पासबुक को आधार बनाया जाता है; नाम और पता बदले जाते हैं. इसी आधार पर सरकारी योजनाओं के लाभ भी मिल जाते हैं. कुल खर्च: “काग़ज़” करीब ₹5,000 में बन जाता है. बर्थ सर्टिफिकेट भी बनवाया जाता है- खासकर बच्चों के लिए. आधार कार्ड फोटो कॉपी देकर एजेंट काम कर देता है; आधार केंद्र पर जाना भी नहीं पड़ता. समय-सीमा: 2–2.5 महीने में दस्तावेज़ तैयार हो जाता है. पश्चिम बंगाल का ‘पहला पेपर’, मुंबई में ‘एड्रेस चेंज’ एजेंट पहले पश्चिम बंगाल का आधार बनवाता/लाता है. मुंबई में एड्रेस चेंज करा दिया जाता है- कई मामलों में नया आधार भी बन जाता है. पहचान ‘लीगल’ होती तो एजेंट के पास आने की ज़रूरत नहीं पड़ती. बॉर्डर पार करके मुंबई तक: एक बांग्लादेशी नागरिक की कहानी NDTV इंडिया की टीम ने ढाका (मनानी) से आने वाले एक बांग्लादेशी नागरिक से बात की, जिसने मुर्शिदाबाद–सुजापुर बॉर्डर से मालगाड़ी/मालवाहक गाड़ी के जरिए छिपकर भारत में घुसने का दावा किया. 5–6 साल पहले बॉर्डर पार; सुजापुर में 4–5 घंटे रुके. मालदा स्टेशन से बिना टिकट ट्रेन पकड़ी; बीच में पकड़े गए तो ₹200 देकर छोड़ दिया गया. बांद्रा टर्मिनस (मुंबई) पहुंचे; पहली रात मस्जिद में रुके- किसी ने देश के बारे में पूछताछ नहीं की. धीरे-धीरे रिक्शा चलाने- सड़क पर काम से रोज़ाना ₹1,500–2,000 कमाई. हवाला-जैसे चैनल/दलाल के जरिए ₹1,000 पर ₹150 शुल्क देकर पैसे ट्रांसफर (दावा). आधार, पैन, वोटर-आईडी बनवाए; 2024 चुनाव से छह महीने पहले वोटर-आईडी के लिए फॉर्म भरा—नाम जुड़ गया और वोट भी किया.   ‘पहचान कैसे होती है?’—भाषाई उच्चारण और स्थानीय संकेत एजेंट्स का कहना है कि भाषा-बोलने का तरीका/उच्चारण देखकर कुछ हद तक पहचान हो जाती है. हालांकि, औपचारिक वेरिफिकेशन के बिना यह कानूनी पुष्टिकरण नहीं है. कई लोग हिंदी फ़िल्मों से हिंदी सीखकर खुलकर घुल-मिल जाते हैं- जिससे संदेह कम होता है.   चुनावी गठजोड़?—एजेंट्स और स्थानीय नेटवर्क एजेंट्स के मुताबिक, लोकल नेता और नेटवर्क परस्पर फायदे के लिए साथ काम करते हैं. बदले में एजेंट्स चुनावों के दौरान मदद करते हैं- लॉजिस्टिक्स, मोबिलाइज़ेशन आदि. इस साझेदारी ने कई इलाकों में संगठित रैकेट का रूप ले लिया है.
    Click here to Read More
    Previous Article
    Trump Claims Iran Seeks Talks, Issues Warning Of Possible US Action
    Next Article
    Inside Details Of Actor Vijay's CBI Questioning In Karur Stampede Case

    Related LatestVideos Updates:

    Are you sure? You want to delete this comment..! Remove Cancel

    Comments (0)

      Leave a comment