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    भारतीय एयरलाइंस ने लॉन्ग रूट्स पर 15% किराया बढ़ाया:क्रूड ऑयल के भाव बढ़ने से जेट फ्यूल के दाम दोगुने हुए, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर

    9 hours ago

    मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे आम आदमी की जेब पर भी पड़ते दिखाई दे रहा है। गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने के बाद अब भारतीय एविएशन कंपनियों ने लंबी दूरी वाले रूट्स पर हवाई किराए में करीब 15% की बढ़ोतरी कर दी है। ब्लूमबर्ग ने अपनी एक रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ती जंग और होर्मुज रूट प्रभावित होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों और जेट फ्यूल के दाम में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। जिसका असर ग्लोबल एविएशन इंडस्ट्री पर भी दिखने लगा है। भारत समेत एशिया की प्रमुख एयरलाइंस ने भी टिकटों के दाम बढ़ा दिए हैं और कई कंपनियां अपने विमानों को ग्राउंडेड करने का प्लान भी बना रही हैं। जानकारों का कहना है कि यह 1970 के दशक के बाद का सबसे बड़ा ऑयल शॉक हो सकता है। भारतीय एयरलाइंस आगे किराया और बढ़ा सकती हैं रिपोर्ट के अनुसार, जेट फ्यूल यानी ATF की कीमतों में हो रहे इजाफे को देखते हुए भारत की एविएशन कंपनियां आने वाले दिनों में किराया और भी बढ़ा सकती हैं। एयरलाइंस का कहना है कि ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ने के कारण उनके पास किराया बढ़ाने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं बचा है। जेट फ्यूल की कीमतें लगभग दोगुनी हो चुकी हैं 28 फरवरी को शुरू हुई ईरान-इजराइल जंग के बाद से तेल की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस वजह से क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत आज 93 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है। वहीं एक दिन पहले ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत करीब 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई थी। वहीं कई मार्केट में जेट फ्यूल की कीमतें संघर्ष शुरू होने के बाद से दोगुनी हो चुकी हैं। जंग से पहले जेट फ्यूल की कीमतें लगभग 85 से 90 डॉलर प्रति बैरल थीं, जो अब बढ़कर 150 से 200 डॉलर प्रति बैरल के बीच पहुंच गई है। वहीं मिडिल ईस्ट के तनाव के कारण दुनियाभर में अब तक 40,000 से ज्यादा उड़ानें कैंसिल भी हुई हैं। वियतनाम में 70% तक महंगे हो सकते हैं टिकट ब्लूमबर्ग ने रिपोर्ट में बताया कि वियतनाम की सरकारी मीडिया ने चेतावनी दी है कि वहां हवाई किराए में 70% तक का उछाल आ सकता है। इसकी मुख्य वजह वियतनाम की इम्पोर्टेड जेट फ्यूल पर भारी निर्भरता है। इंडस्ट्री एनालिस्ट्स के अनुसार, एशियाई एयरलाइंस यूरोपीय या अमेरिकी एयरलाइंस की तुलना में ज्यादा खतरे में हैं, क्योंकि इनके पास फ्यूल हेजिंग (ईंधन की कीमतों को लॉक करने का प्रोग्राम) की पुख्ता व्यवस्था नहीं है। एविएशन सेक्टर में हर तरफ पैनिक की स्थिति है स्पार्टा कमोडिटीज की सीनियर ऑयल मार्केट एनालिस्ट जून गोह ने बताया, एविएशन सेक्टर में हर तरफ पैनिक की स्थिति है। जिन एशियाई एयरलाइंस का हेजिंग प्रोग्राम कमजोर है, वे सबसे ज्यादा मुश्किल में हैं। उन्होंने कम कीमत पर टिकट बेच दिए थे, लेकिन अब उन्हें बहुत महंगे रेट पर फ्यूल खरीदना पड़ रहा है। कुछ लो-कॉस्ट एयरलाइंस तो अब विमानों को खड़ा करने की तैयारी में हैं। क्योंकि मौजूदा फ्यूल कीमतों पर उड़ान भरना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। हालात नहीं सुधरे, तो छोटी एयरलाइंस बंद हो सकती हैं जर्मन बैंक डॉयचे बैंक के एनालिस्ट्स का कहना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो दुनिया भर में हजारों विमान खड़े हो सकते हैं और कुछ छोटी एयरलाइंस बंद भी हो सकती हैं। लुफ्थांसा जैसी कंपनियों को मिल सकता है फायदा जहां ज्यादातर एयरलाइंस संकट में हैं, वहीं लुफ्थांसा जैसी कंपनियां इसे मौके के तौर पर देख रही हैं। लुफ्थांसा के CEO कार्सन स्पोह्र ने कहा कि उनकी कंपनी ने फ्यूल प्राइज को हेज किया हुआ है, जिससे उन्हें 'रिलेटिव एडवांटेज' मिलेगा। वे मिडिल ईस्ट की एयरलाइंस के प्रभावित होने का फायदा उठाते हुए एशिया और अफ्रीका के रूट्स पर अपनी क्षमता बढ़ाने का प्लान बना रहे हैं। ये खबर भी पढ़ें… कई राज्यों में कॉमर्शियल गैस सिलेंडर सप्लाई बंद: गैस नहीं मिलने से होटल-रेस्टोरेंट बंद होने की नौबत; जमाखोरी रोकने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग की वजह से हॉर्मुज जलमार्ग के रास्ते गैस सप्लाई ठप हो गई है। इससे देश में LPG की किल्लत हो रही है। दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत कई राज्यों ने कॉमर्शियल गैस की सप्लाई पर रोक लगा दी है। गैस सप्लाई बंद होने की वजह से कई शहरों में रेस्टोरेंट्स और होटल बंद होने की नौबत आ गई है। ऐसे में सरकारी सूत्रों का कहना है कि तेल कंपनियां तीन सदस्यी कमेटी के जरिए रेस्टोरेंट एसोसिएशनों से बात करेंगी, ताकि LPG सप्लाई की दिक्कतों को समझा जा सके। पूरी खबर पढ़ें…
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