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    भगवंत मान अकाल तख्त में पेश होने वाले चौथे CM:बरनाला को सबसे सख्त सजा मिली; बादल को सजा के बाद अवॉर्ड पर विवाद हुआ

    13 hours ago

    भगवंत मान पंजाब के चौथे मुख्यमंत्री हैं, जाे अमृतसर में श्री अकाल तख्त साहिब में पेश हो रहे हैं। अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने गुरुओं के दसवंध के सिद्धांत-गुरू की गोलक, एक आपत्तिजनक वीडियो को लेकर उन्हें स्पष्टीकरण देने के लिए बुलाया है। भगवंत मान से पहले 3 और मुख्यमंत्री भीमसेन सच्चर, सुरजीत सिंह बरनाला और प्रकाश सिंह बादल अकाल तख्त पर पेश हो चुके हैं। भीमसेन सच्चर अविभाजित पंजाब के दूसरे मुख्यमंत्री थे। अकाल तख्त पर पेश होने वाले मुख्यमंत्रियों में सबसे सख्त सजा सुरजीत सिंह बरनाला को दी गई थी। उन्हें पंथ से निष्कासित करने के साथ गले में तख्ती डालकर पेश होने को कहा गया था। सबसे ज्यादा विवाद प्रकाश सिंह बादल को लेकर हुआ। इसकी वजह ये थी कि सजा पूरी करने के बाद उन्हें फक्र ए कौम अवार्ड से नवाजा गया। जिसका सिखों के भीतर ही विरोध हुआ। पंजाब के मुख्यमंत्री अकाल तख्त पर कब पेश हुए, उन्हें क्यो तलब किया गया, क्या सजा मिली, पढ़िए पूरी रिपोर्ट.... 1. भीम सेन सच्चर 2 . सुरजीत सिंह बरनाला 3 .प्रकाश सिंह बादल CM भगवंत मान को धार्मिक सजा नहीं होगी... सीएम भगंवत मान पर आरोप है कि उन्होंने सिखों की पवित्र परंपरा दसवंध और गुरुद्वारों की गोलक के मिसयूज को लेकर टिप्पणियां कीं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से लोगों से गोलक में पैसे न डालने की बात कही थी, जिसे सिख सिद्धांतों पर हमला माना गया। सीएम ने बार-बार ऐसे बयान दिए जो सिख रहत मर्यादा और अकाल तख्त की सर्वोच्चता को चुनौती देते हैं। हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें मुख्यमंत्री के कैरेक्टर को लेकर सवाल उठे। अकाल तख्त ने इसे सिख भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला माना। हालांकि सीएम मान को धार्मिक सजा नहीं मिलेगी क्योंकि अकाल तख्त उन्हें पूर्ण सिख नहीं मानता। उनसे सिर्फ स्पष्टीकरण लिया जाएगा। जानें श्री अकाल तख्त क्या है? SGPC मेंबर भाई मंजीत सिंह ने बताया कि श्री अकाल तख्त साहिब सिखों की सर्वोच्च राजनीतिक और न्यायिक संस्था है। इसका काम सिख समुदाय के सांसारिक और धार्मिक मामलों पर कौम का मार्गदर्शन करना और निर्णय लेना है। अकाल तख्त की स्थापना 5वें पातशाह श्री गुरु अर्जुन देव के बेटे गुरु श्री हरगोबिंद पातशाह ने 1606 में की। उन्होंने देखा कि दुनिया में बहुत बड़ा जुल्म हो रहा था। इस पर उन्होंने दो तलवारें अपनाने का सिद्धांत बनाया। एक मीरी और दूसरी पीरी। इसका मतलब ये था कि धर्म और सियासत पर फैसले एक मंच से लिए जाएंगे। श्री अकाल तख्त अमृतसर में हरमंदिर साहिब के ठीक सामने अकाल तख्त स्थित है। अकाल तख्त का मतलब काल रहित परमात्मा का सिंहासन है। यह सिखों के 5 तख्तों में सबसे सर्वोच्च और पुराना है। सिख धर्म या समुदाय से जुड़े किसी भी महत्वपूर्ण विषय या विवाद पर यहां से हुक्मनामा जारी किया जाता है। यह हुक्मनामा पूरी दुनिया के सिखों के लिए मानना जरूरी होता है। ************************
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