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    अविमुक्तेश्वरानंद बोले- मुझ पर कॉकटेल प्रहार हो रहा:रामभद्राचार्य के शिष्य ने कहा था- शंकराचार्य ने 20 बच्चों का यौन शोषण किया

    15 hours ago

    शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने 2 नहीं, 20 बच्चों का यौन शोषण किया है। उनके शिविर में नाबालिग बच्चों का यौन शोषण होता है। उनके पास आय से अधिक संपत्ति भी है। - आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज, 10 फरवरी, 2026 कोर्ट को हमने साक्ष्य दिए हैं। हमारे खिलाफ ग्रुप बनाकर आरोप लग रहे हैं। काकटेल जैसा प्रहार हो रहा है। - अविमुक्तेश्वरानंद, शंकराचार्य, 11 फरवरी, 2026 जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में बच्चों के यौन शौषण होने का आरोप लगाया। इसके बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- ऐसे आरोप लगा दिए गए हैं, जिनकी कल्पना करना भी मुश्किल होता है। आशुतोष ब्रह्मचारी ने 8 फरवरी को प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में वाद (शिकायत) दायर किया। कहा- गुरुकुल की आड़ में शंकराचार्य बाल उत्पीड़न करते हैं। अपने आरोपों की पुष्टि के लिए आशुतोष ब्रह्मचारी ने 2 बच्चों को भी पेश किया। कोर्ट के नोटिस पर अविमुक्तेश्वरानंद के वकील ने 10 फरवरी को जवाब दाखिल किया। इसके बाद उल्टा आशुतोष महाराज पर गंभीर आरोप लगाए। अब 20 फरवरी को दोनों पक्षों के वकील कोर्ट में पेश होंगे। आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज के आरोपों पर दैनिक भास्कर ने वाराणसी में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वनंद से बात की। पढ़िए उन्होंने क्या कहा… सवाल : आपके खिलाफ यौन शोषण का मामला कोर्ट पहुंचा है? शंकराचार्य : देखिए, जब से हमने गौ माता की रक्षा के लिए आवाज उठानी शुरू की है, तब से सरकार और कुछ लोगों को यह पसंद नहीं आ रहा है। पहले हमें अपमानित किया गया, हमारे लोगों को धमकाया गया, मारपीट की गई। जब उससे भी बात नहीं बनी, तब अत्यंत घिनौने आरोप लगाए गए हैं। ऐसे आरोप जिनकी कल्पना भी सभ्य समाज नहीं कर सकता, लेकिन सत्य को आंच नहीं आती। हमने कोर्ट में सारे साक्ष्य दिए हैं। सवाल : अगर आरोप झूठे हैं, तो क्या कार्रवाई करवाना चाहेंगे? शंकराचार्य : पॉक्सो एक्ट की धारा 22 के तहत अगर कोई विद्वेषपूर्ण भावना से झूठा आरोप लगाता है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है। कोर्ट ने हमारे प्रमाण स्वीकार कर लिए हैं। संबंधित व्यक्ति को 20 तारीख को जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया है। हमें न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है। सवाल : आपने मुख्यमंत्री को चुनौती दी, क्या इसलिए ये सब हो रहा? शंकराचार्य : हमने मुख्यमंत्री को कोई व्यक्तिगत चुनौती नहीं दी। सिर्फ इतना कहा कि गौ माता को ‘राज्यमाता’ घोषित किया जाए और गौ मांस के निर्यात को बंद किया जाए। अगर हम यह मांग करते हैं तो इसमें गलत क्या है? सवाल : आरोप है कि आपके पास आय से अधिक संपत्ति है? शंकराचार्य : यह सिर्फ आरोप है। जांच हो जाएगी तो सच्चाई सामने आ जाएगी। प्रश्न यह है कि हमारी आय ही क्या है? हम कोई वेतनभोगी कर्मचारी नहीं हैं। न हम किसी सरकारी पद पर हैं, न हम वेतन लेते हैं। आय से अधिक संपत्ति का आरोप उन पर लगता है जिनकी नियमित आय होती है। शंकराचार्य के रूप में हमारे पास व्यक्तिगत संपत्ति नहीं है। ऐसा लगता है जैसे आरोपों की एक सूची बनाकर एक-एक करके लगाए जा रहे हैं। यह एक प्रकार से एक ग्रुप के द्वारा ‘काकटेल’ बनाकर प्रहार करने जैसा है। सवाल : क्या चारों शंकराचार्य एक साथ बैठ सकते हैं? शंकराचार्य : समय आने दीजिए, सब बैठेंगे। अभी हमारे ऊपर आरोप लगाए गए हैं। कोर्ट दूध का दूध और पानी का पानी करेगा। इस प्रकार के मामलों में फैसले जल्दी आने चाहिए। साथ ही, कानून कहता है कि ऐसे मामलों में किसी की पहचान सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए, फिर भी कुछ लोग ऐसा कर रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि उनका उद्देश्य समाधान नहीं, बल्कि बदनामी है। सवाल : बद्रीनाथ-केदारनाथ में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध क्यों? शंकराचार्य : मंदिर की मर्यादा सुरक्षित रहनी चाहिए। काशी विश्वनाथ मंदिर में पहले स्पष्ट रूप से बोर्ड लगा था- आर्य धर्म न मानने वालों का प्रवेश निषिद्ध है। वह बोर्ड हिंदी, संस्कृत और अंग्रेजी में था। अब वह बोर्ड हटा दिया गया है। हम मांग करते हैं कि वह परंपरागत बोर्ड दोबारा स्थापित किया जाए। मंदिर की मर्यादा तभी सुरक्षित रह सकती है, जब वहां आने वाला व्यक्ति उस मर्यादा को समझता और स्वीकार करता हो। अब जानिए आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने क्या आरोप लगाए पहले पुलिस कमिश्नर से शिकायत की, फिर कोर्ट गए 24 जनवरी यानी मौनी अमावस्या के 6 दिन बाद आशुतोष महराज ने प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर से अविमुक्तेश्वरानंद की 2 शिकायतें की थीं। पहली शिकायत में आरोप लगाया कि अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर और गुरुकुल में नाबालिग बच्चों को रखा जाता है। उनसे निजी सेवा, भीड़ जुटाने, कार्यक्रमों और पालकी उठवाने जैसे काम कराए जाते हैं। बच्चों का यौन शोषण होने की भी आशंका है। माघ मेले जैसे बड़े आयोजनों में भी बच्चों से काम कराया गया। यह बाल अधिकार और श्रम कानूनों का उल्लंघन है। शिविर में अवैध हथियार होने की भी आशंका है। आय से अधिक संपत्ति और कई बैंक खातों की जांच की जानी चाहिए। मुकुंदानंद नाम के व्यक्ति की भूमिका की जांच कराई जाए। दूसरी शिकायत में आशुतोष महराज ने अविमुक्तेश्वरानंद पर फर्जी लेटरपैड और दस्तावेज बनाने का आरोप लगाया। कहा कि माघ मेला क्षेत्र में अविमुक्तेश्वरानंद खुद को ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य बता रहे। वह “ज्योतिष्पीठ/श्री शंकराचार्य शिविर” के नाम से लेटरपैड और दस्तावेज बनवाकर अफसरों को पत्र भेज रहे। ये लेटरपैड-पत्र फर्जी और भ्रामक हैं। इनसे प्रशासन और आम लोगों को गुमराह किया जा रहा। इन लेटरपैड पर 24 जनवरी, 2026 (माघ शुक्ल पंचमी) की तारीख दर्ज है। इसी तारीख का इस्तेमाल कर “श्री शंकराचार्य शिविर” के नाम से पत्र जारी किए गए, जिनकी वैधता पर सवाल उठाए गए। पढ़िए आशुतोष महाराज ने कोर्ट में जो वाद दायर किया जब प्रशासन ने आशुतोष महाराज की शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की, तो उन्होंने 8 फरवरी को कोर्ट में वाद दायर किया। इसमें उन्होंने लिखा- मेरे ट्रस्ट की ओर से माघ मेला में श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मुक्ति के लिए माता शाकुंभरी देवी का महायज्ञ किया जा रहा है। मेरे शिविर में 2 शिष्य आए, जो नाबालिग हैं। उन्होंने मेरे सामने कई खुलासे किए। उन्होंने मुझसे शिष्य बनने की इच्छा चाही। कहा कि हम असुरक्षित हैं। मुझसे पुलिस संरक्षण और न्यायिक सहायता मांगी। बच्चों ने मुझे बताया कि अविमुक्तेश्वरानंद और उनके सहयोगियों ने हमें अपने साथ रखा। कई बार कुकर्म किया। यह सब एक साल तक किया गया। महाकुंभ- 2025 के दौरान मेला क्षेत्र में भी कुकर्म किया गया। माघ मेला- 2026 के दौरान दोनों बच्चों से फिर से कुकर्म किया गया। अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्य यह कहकर बच्चों पर दबाव बनाते थे कि यह गुरु-सेवा है। इससे आशीर्वाद मिलेगा। बच्चों ने यह भी बताया कि उन्हें अविमुक्तेश्वरानंद के साथ भी सोने को कहा जाता है। दोनों बच्चे मौका पाकर हमारे शिविर में आए। इसके बाद 24 जनवरी को झूंसी थाने में शिकायत दी गई। 25 जनवरी को पुलिस कमिश्नर और पुलिस अधीक्षक माघ मेला को ई-मेल से शिकायत की। 27 जनवरी को डाक से पुलिस अधीक्षक माघ मेला को शिकायत भेजी गई। लेकिन, कोई FIR नहीं दर्ज हुई। इसके बाद मुझे धमकियां मिलने लगीं। जानिए आशुतोष महाराज कौन है? आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज का जन्म शामली जनपद के कांधला कस्बे के एक पंडित परिवार में हुआ था। इनके पिता राजेंद्र पांडे दिल्ली रोड पर चलने वाली प्राइवेट बसों में कंडक्टर की करते थे। आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज कांधला के प्राचीन शाकंभरी सिद्धप्पीठ मंदिर की कमेटी से जुड़े। वर्तमान में वह प्रबंधक भी हैं। इन्हीं के परिवार के चाचा प्रदीप पांडे मंदिर में पुजारी हैं। 2022 में उन्होंने जगतगुरु रामभद्राचार्य से दीक्षा ली थी, इसके बाद से वह सन्यासी जीवन जी रहे है। ------------------------- ये पढ़ें - अविमुक्तेश्वरानंद बोले-योगी मुख्यमंत्री या महंत में से एक पद छोड़ें:सीएम खलीफा जैसे, भगवा पहनने वाला मीट का व्यापार नहीं प्रयागराज माघ मेला छोड़ने के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद इन दिनों काशी में हैं। यहां सोमवार को शंकराचार्य एक बार फिर खुलकर बोले। उन्होंने कहा- योगी खलीफा जैसे हैं। वह सीएम की कुर्सी छोड़ दें या फिर महंत का पद। योगी को असली हिंदू साबित करने के लिए मैंने 40 दिन दिए थे। 10 दिन बीत गए, अब उनके पास 30 दिन बचे हैं। पढ़िए पूरी खबर…
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