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    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का बड़ा अभियान‎:दुर्लभ खनिजों में चीनी दबदबा घटाने के लिए खेला दांव, 2 लाख करोड़ का प्रोजेक्ट‎

    9 hours ago

    सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण खनिजों की‎ ग्लोबल सप्लाई पर चीन की पकड़ खत्म करने के‎ लिए अमेरिका ने प्रयास तेज कर दिए हैं। अमेरिकी ‎सरकार ने अर्जेंटीना से लेकर उजबेकिस्तान तक 20 देशों से जरूरी खनिजों से जुड़े करार किए हैं। इसके‎ अलावा चीन के सस्ते माल की डंपिंग से पश्चिमी‎ देशों की खदानों को सुरक्षित रखने के लिए अमेरिका‎ दर्जनों माइनिंग प्रोजेक्ट को सहयोग कर रहा है।‎ अमेरिका के कई सरकारी संस्थान अहम मिनरल्स‎ प्रोडक्शन के लिए 2 लाख करोड़ रुपए से अधिक के ‎प्रोजेक्ट की मदद कर रहे हैं। इनमें निवेश, कर्ज और ‎सब्सिडी तक शामिल है।‎ दुनिया के कई सबसे अहम मिनरल्स की माइनिंग और रिफाइनिंग में चीन बहुत आगे है।‎ कंप्यूटिंग, इलेक्ट्रिफिकेशन, एयरोस्पेस और ‎सैनिक साजो-सामान बनाने के लिए जरूरी कोई 30 से 60 धातुएं इसमें शामिल हैं। इसके‎अलावा आईफोन, डेटा सेंटर, सर्जिकल लेसर‎ और मिलिटरी टेक्नोलॉजी में इस्तेमाल होने वाले‎ भारी दुर्लभ खनिज इसी से मिलते हैं। कई अहम‎ धातुओं पर चीन का नियंत्रण होने से उसे अपने‎ आर्थिक और सैन्य प्रतिद्वंद्वियों पर काफी बढ़त ‎हासिल है।‎ पिछले साल अप्रैल में चीन ने अमेरिका को सात ‎सबसे कीमती रेयर अर्थ मैटर की सप्लाई सीमित कर दी थी। इसकी कमी से एफ-35 जेट विमानों, ‎मिसाइलों, ड्रोन्स, राडार और इलेक्ट्रिक मोटरों की‎ सप्लाई रुकने का खतरा पैदा हो गया था। इसका‎ असर इतना गहरा हुआ कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने फौरन‎ चीन पर लागू अपने टैरिफ वापस ले लिए थे। चीन ‎ने अब भी एंटिमनी, टंग्सटन से लेकर दर्जनों‎ मिनरल्स की बिक्री सीमित कर रखी है। ऐसे में ट्रम्प‎ प्रशासन ने चीन की सर्वोच्चता का मुकाबला करने‎ का फैसला किया है।‎ चीन प्रतिद्वंद्वियों को कुचलने के लिए बाजार में ‎‎अपनी ताकत का इस्तेमाल करता है। वह मूल्य कम ‎‎करने के लिए कुछ खास धातुओं की अंधाधुंध‎ सप्लाई करता है। नतीजतन मौजूदा खदानें कारोबार‎ से बाहर हो जाती हैं या नए प्रोजेक्ट बंद हो जाते हैं। ‎किसी समय दुनिया की सबसे बड़ी रेयर अर्थ माइन‎ "कैलिफोर्निया माउंटेन पास'' के 2002 में बंद होने‎ में चीन के सस्ते रेयर अर्थ्स की भी भूमिका है। इस खदान का स्वामित्व अब दूसरे हाथों में है। चीनी‎ कंपनियों ने माली से मेक्सिको तक इनमें से कई ‎खदानें खरीद लीं।‎ ट्रम्प सरकार ने एक्सपोर्ट इंपोर्ट बैंक (एक्जिम), ‎ऊर्जा और प्रतिरक्षा विभाग, यूएस इंटरनेशनल ‎डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन जैसी संस्थाओं के‎ जरिए निवेश और उत्पादन बढ़ाने का काम शुरू‎किया है। इस अभियान में अमेरिकी भूभर्ग सर्वे द्वारा‎ घोषित सभी 60 मिनरल्स शामिल हैं। इनमें‎ एल्युमीनियम, लेड और जिंक जैसी धातुएं भी हैं।‎ दूसरे देशों में कई प्रोजेक्ट के लिए कर्ज दिए, भारी निवेश भी‎ - 60‎ बेहद महत्वपूर्ण धातुओं की‎ माइनिंग और रिफायनिंग में ‎चीन का दबदबा है।‎ - 20‎ देशों से समझौते किए हैं‎ अमेरिका ने रेयर अर्थ्स की‎ माइनिंग पर।‎ पिछले वर्ष एक्जिम ने अहम मिनरल प्रोजेक्ट के‎ लिए 1.36 लाख करोड़ रुपए के आशय पत्र जारी‎ किए हैं। इनमें अमेरिका में रेयर अर्थ वेंचर के लिए‎ 4138 करोड़ रुपए और ऑस्ट्रेलिया में कोबाल्ट,‎ निकल के लिए 3183 करोड़ रु. शामिल हैं। ऊर्जा विभाग ने ग्रेफाइट, लिथियम और पोटाश ‎के लिए घरेलू कंपनियों को 63 हजार करोड़ रु.‎ से अधिक कर्ज मंजूर किए हैं। डीएफसी ने यूक्रेन‎ और कांगो में अहम मिनरल्स के लिए 16 हजार ‎करोड़ की फंडिंग की है।‎ ट्रम्प प्रशासन का तीन‎ बिंदुओं पर खास जोर‎ ट्रम्प प्रशासन प्रोजेक्ट को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए तीन‎ बिंदुओं पर जोर दे रहा है। पहला-‎कर्ज और सीधे इन्वेस्टमेंट से नई‎ खदानों के लिए सब्सिडी। दूसरा - प्रोजेक्ट वॉल्ट के तहत‎ माइनर्स के प्रोडक्ट की खरीद की‎ गारंटी। तीसरा- चीन के सस्ते माल‎ की डंपिंग से माइनर्स को बचाने के‎ लिए मूल्य में हस्तक्षेप।‎‎ डिफेंस विभाग ने भी‎ शुरू किया दखल‎ पिछले साल अक्टूबर के बाद से अमेरिकी रक्षा विभाग-पेंटागन ने आठ माइनिंग और रिफायनिंग प्रोजेक्ट्स को 25‎हजार करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज और अंशपूंजी दी है। ये प्रोजेक्ट गैलियम और जर्मेनियम जैसी धातुओं से‎संबंधित हैं। चीन कई बार इनका निर्यात बंद कर चुका है।‎
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