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    अमेरिकी इंटेलिजेंस डायरेक्टर बोलीं-पाकिस्तानी मिलाइलें अमेरिका के लिए खतरा:रूस-चीन, उत्तर-कोरिया भी उसी कैटेगरी में; US तक पहुंचने वाली मिसाइलें 2035 तक 16000 से ज्यादा होंगी

    9 hours ago

    अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गबार्ड ने कहा है कि पाकिस्तान लंबी दूरी की ऐसी बैलिस्टिक मिसाइलें डेवलप कर रहा है, जो अमेरिका तक हमला करने में सक्षम हो सकती हैं। उन्होंने यह बयान वॉशिंगटन DC में सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी की वैश्विक खतरे से संबंधित सुनवाई में दिया। गबार्ड के मुताबिक, इंटेलिजेंस कम्यूनिटी(IC) का आकलन है कि 2035 तक अमेरिका के लिए खतरा पैदा करने वाली मिसाइलों की संख्या 3,000 से बढ़कर 16,000 से ज्यादा हो सकती है। रूस, चीन, उत्तर कोरिया, ईरान और पाकिस्तान परमाणु और पारंपरिक हथियार ले जाने वाले नए मिसाइल सिस्टम डेवलप कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के मिसाइल प्रोग्राम में ऐसी इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल हो सकती हैं, जिनकी मारक क्षमता अमेरिका तक है। वहीं ईरान के पास भी ऐसी तकनीक मौजूद है, जिससे वह 2035 से पहले ICBM विकसित कर सकता है। गबार्ड बोलीं- रूस और चीन अमेरिकी मिसाइल डिफेंस सिस्टम भेद सकते हैं गबार्ड ने चीन और रूस को सबसे बड़ा और लगातार खतरा बताया। उनके मुताबिक, ये देश ऐसी उन्नत तकनीक विकसित कर रहे हैं जो अमेरिकी मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भेद सकती हैं। उन्होंने उत्तर कोरिया के साइबर खतरे का भी जिक्र किया और कहा कि 2025 में उसने क्रिप्टोकरेंसी चोरी के जरिए करीब 2 बिलियन डॉलर जुटाए, जिससे उसके हथियार कार्यक्रम को फंड मिला। सुनवाई के दौरान ईरान के साथ संभावित युद्ध और पहले दी गई खुफिया जानकारी पर गबार्ड ने सवालों का सीधा जवाब देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वे आंतरिक चर्चाओं का खुलासा नहीं कर सकतीं। साथ ही यह भी चिंता जताई गई कि अगर ईरान पर हमला होता है तो वह होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर सकता है, जो वैश्विक तेल और गैस सप्लाई का अहम मार्ग है। गबार्ड के जवाब से डेमोक्रेट नाराज तुलसी गबार्ड ने रिपब्लिकन राष्ट्रपति को दी गई खुफिया जानकारी के बारे में पूछे गए सवालों को बार-बार टाल दिया। इससे डेमोक्रेट नाराज हो गए। सीनेट खुफिया समिति के शीर्ष डेमोक्रेट, वर्जीनिया के सीनेटर मार्क वार्नर ने गबार्ड से पूछा कि क्या उन्होंने ट्रंप को सलाह दी थी कि अगर ईरान को अमेरिकी हमलों का निशाना बनाया गया तो वह खाड़ी देशों पर हमला करेगा और होर्मूज स्ट्रेट को बंद कर देगा। इस सवाल का भी गबार्ड ने सीधा जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा- मैंने आंतरिक बातचीत का खुलासा नहीं किया है और न ही करूंगी। उन्होंने कहा, मैं यह कहना चाहूंगी कि खुफिया समुदाय में हम सभी राष्ट्रपति को उनके फैसलों में मदद करने के लिए उपलब्ध सभी बेहतरीन वस्तुनिष्ठ खुफिया जानकारी प्रदान करते रहते हैं। 19 फरवरी: पाकिस्तानी पीएम ने ट्रम्प को ‘दक्षिण एशिया का रक्षक’ बताया था फरवरी में बोर्ड ऑफ पीस मीटिंग के दौरान ट्रम्प ने कहा था कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने उनके चीफ ऑफ स्टाफ के सामने यह बात मानी थी कि उनकी पहल से भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित युद्ध टल गया। ट्रम्प के मुताबिक, अगर यह टकराव नहीं रुकता तो करीब 2.5 करोड़ लोगों की जान खतरे में पड़ सकती थी। उन्होंने दावा किया कि उनकी वजह से दोनों देशों के बीच हालात काबू में आए और बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान टल गया। इस दौरान ट्रम्प ने शहबाज शरीफ से खड़े होने के लिए कहा वो खड़े हो गए। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इस दौरान शहबाज शरीफ ने ट्रम्प को दक्षिण एशिया की हिफाजत करने वाला बताया। पूरी खबर पढ़ें… ------------ ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प की तारीफ करने पर पाकिस्तानी-PM अपने देश में ट्रोल:लोग बोले- शरीफ को चापलूसी का नोबेल दो, हमारे नेता इतने चाटुकार क्यों पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को उनके ही देश में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प का चापलूस और चाटुकार बताकर ट्रोल किया गया। कुछ सोशल मीडिया यूजर ने कहा कि अगर चापलूसी के लिए नोबेल होता, तो शरीफ सबसे बड़े दावेदार होते। दरअसल, 19 फरवरी को मिस्र में गाजा पीस समिट के दौरान शरीफ ने ट्रम्प के भारत-पाकिस्तान संघर्ष रुकवाने के दावे का समर्थन किया था। शरीफ ने ट्रम्प को नोबेल देने की मांग की थी। पूरी खबर पढ़ें…
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