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    आंध्र के अमरावती में बनेगी देश की पहली AI यू​निव​र्सिटी:19 फरवरी को रखी जाएगी आधारशिला; 2029 से एडमिशन शुरू होंगे, 8वीं से मिलेगा प्रवेश

    9 hours ago

    जिस तेजी से एआई (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) हमारी जिंदगी से जुड़ रहा है, भविष्य में हमें स्कूल-कॉलेज में ऐसी पढ़ाई की जरूरत होगी, जो सिर्फ एआई का ही ज्ञान देती हो, ताकि एआई की दुनिया में इसके प्रोफेशनल्स की कमी न पड़े। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए आंध्र प्रदेश सरकार अमरावती में देश की पहली एआई यूनिवर्सिटी बनाने जा रही है। मैं इस वक्त अमरावती में उसी जमीन पर खड़ा हूं, जहां 19 फरवरी को भविष्य को आकार देने वाली एआई यूनिवर्सिटी की आधारशिला रखी जानी है। माइक्रोसॉफ्ट के सह संस्थापक ​बिल गेट्स के भी इस दौरान मौजूद रहने की संभावना है। बड़ी बात है कि दुनिया की सबसे बड़ी कंप्यूटर चिप निर्माता कंपनी एनवीडिया इस काम में आंध्र सरकार की मदद कर रही है। एनवीडिया तकनीकी सहयोग के साथ-साथ यहां सिलेबस, एआई कोर्स किट भी तैयार करवाएगी। जीपीयू (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट) आधा​रित कंप्यू​​टिंग संसाधन भी देगी। जबकि यू​निवर्सिटी का इंफ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी आंध्र सरकार दे रही है। ​फिलहाल तो 65 एकड़ जमीन पर काम शुरू हो चुका है। भविष्य में एनवीडिया जैसी ही एआई कंपनियां भी जुड़ेंगी, जो ​रिसर्च लैब्स डेवलप करेंगी। आंध्र सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी स​चिव भास्कर कटमनेनी के मुताबिक यह यूनिवर्सिटी आईआईटी, आईआईआईटी से एकदम अलग है। यहां सिर्फ ग्रेजुएशन नहीं होगा, बल्कि कक्षा 8 से ही एआई को समझने वाले बच्चों को भर्ती करेंगे। उन्हें पीएचडी तक की पढ़ाई कराएंगे। इसके लिए स्कॉलरशिप देंगे। 2028 तक यह काम करने लगेगी। 2029 से एडमिशन होंगे। इसी यूनिवर्सिटी में देश का पहला स्वदेशी लार्ज लैंग्वेज मॉडल (एलएलएम) तैयार होगा, जो चैटजीपीटी और जेमिनाई से आगे भारतीय भाषाओं, संस्कृति और सामाजिक जरूरतों के अनुरूप होगा। इस यूनिव​र्सिटी के ​जरिए देश-दु​निया के 500 एआई स्टार्टअप्स को भी मदद देंगे। रतन टाटा इनोवेशन हब के ज़रिये छात्रों को लाइव इंडस्ट्री प्रोजेक्ट्स मिलेंगे। इनके समाधान के लिए नए एआई टूल्स यहीं विकसित होंगे। अमरावती को ही क्यों चुना अमरावती बड़ा शैक्षणिक केंद्र है। यहां वीआईटी, एसआरएम, अमृता विवि, एनआईडी, बीआईटीएस और लॉ यूनिवर्सिटी जैसे संस्थान मौजूद हैं। इन्हीं संस्थानों के छात्र, शिक्षक और शोध वातावरण का लाभ उठाने के लिए अमरावती को एआई विश्वविद्यालय के लिए चुना गया। सिलेबस: बच्चों को एआई से खुद समाधान खोजना सिखाएंगे - कटमनेनी के मुताबिक जहां आईआईटी और आईआईआईटी तकनीकी डिग्री और कोडिंग पर केंद्रित हैं, वहीं एआई यूनिवर्सिटी बहुविषयक मॉडल पर आधारित होगी। पढ़ाई पूरी तरह प्रोजेक्ट-आधारित और व्यावहारिक होगी, जिसमें डिग्री से ज्यादा कौशल को महत्व दिया जाएगा। - इसी हिसाब से सिलेबस को तीन ​हिस्सों में शुरू करेंगे। पहला, स्कूल स्तर। इसमें छात्रों को एआई की बुनियादी पढ़ाई के साथ ही मशीन ल​र्निंग, कंप्यूटर विजन, नेशनल लैंग्वेज प्रोसेसिंग की समझ विक​​सित की जाएगी। - दूसरा- कॉलेज स्तर। इसमें पढ़ाई नाम मात्र की रहेगी, सिर्फ प्रैक्टिकल होंगे, जिसमें नए-नए तरह के एआई मॉडल बनाए जाएंगे। इंजीनियरिंग, मेडिकल, कानून, कृषि, सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों के छात्र अपने-अपने क्षेत्र से जुड़े एआई मॉडल विकसित करेंगे। उदाहरण के तौर पर, कोई छात्र कृषि में फसल अनुमान के लिए एआई मॉडल बनाएगा, तो कोई कानून से जुड़ा छात्र केस एनालिसिस के लिए एआई का प्रयोग करेगा। यहां शिक्षा पूरी तरह प्रोजेक्ट-आधारित और प्रयोगात्मक होगी। - तीसरा- पोस्ट ग्रेजुएशन व पीएचडी। इसमें गहन शोध पर ही फोकस होगा। भविष्य की मशीनों की समझ विकसित करना, नए एल्गोरिद्म, बड़े भाषा मॉडल बनाना। भारतीय जरूरतों के अनुरूप स्वदेशी मॉडल तैयार करना इसका फोकस एरिया रहेगा।
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